कासगंज की तीन आर्द्रभूमि उप्र राजपत्र में शामिल की गईं : एनएमसीजी

कासगंज की तीन आर्द्रभूमि उप्र राजपत्र में शामिल की गईं : एनएमसीजी

कासगंज की तीन आर्द्रभूमि उप्र राजपत्र में शामिल की गईं : एनएमसीजी
Modified Date: August 19, 2026 / 03:26 pm IST
Published Date: August 19, 2026 3:26 pm IST

नयी दिल्ली, 19 अगस्त (भाषा) उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले की तीन आर्द्रभूमि – बस्तौली ब्रह्मपुर, राम छितौनी और सिकंदरपुर खुर्द – को राज्य के राजपत्र में शामिल किया गया है। इससे इन्हें कानूनी संरक्षण मिल गया है और इन अधिसूचित इलाकों में निर्माण, कचरा फेंकने और अतिक्रमण पर रोक लगा दी गई है। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) ने बुधवार को यह जानकारी दी।

एनएमसीजी के अनुसार, पटियाली और सहावर इलाकों में फैली ये तीनों आर्द्रभूमि स्थानीय जैव-विविधता, भूजल पुनर्भरण और बारिश का पानी जमा करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।

इसके अनुसार, लगभग 5.8 हेक्टेयर में फैली बस्तौली ब्रह्मपुर, पटियाली इलाके में देवकली और गजौरा गांवों के बीच स्थित है और अपनी साझा सीमा पर बसे इन दोनों गांवों के लिए पानी का स्रोत है।

वहीं, लगभग 4.6 हेक्टेयर में फैली राम छितौनी, सहावर-गंज डुंडवारा इलाके के गांवों के बीच स्थित है। एनएमसीजी के अनुसार इसका धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है और यह महर्षि वाल्मीकि के आश्रम से जुड़ी है।

आर्द्रभूमि (वेटलैंड) ऐसा भूमि क्षेत्र है जो स्थायी या मौसमी रूप से पानी से संतृप्त या जलमग्न रहता है। इनमें दलदल, झीलें, मैंग्रोव और बाढ़ के मैदान शामिल हैं। यह जैव विविधता और पर्यावरण संतुलन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

एनएमसीजी के मुताबिक, तीनों आर्द्रभूमि में सबसे बड़ी सिकंदरपुर खुर्द लगभग 9.6 हेक्टेयर में फैली है और पटियाली इलाके में सिकंदरपुर ढाब, सुनगढ़ी और खिजारपुर गांवों की सीमाओं पर स्थित है।

उसने कहा कि ये आर्द्रभूमि प्रवासी पक्षियों और जलीय जीवों का ठिकाना हैं और मछली पालन और खेती के जरिए स्थानीय लोगों की आजीविका में मदद करती हैं।

भाषा शफीक देवेंद्र

देवेंद्र


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