श्रमिक संगठनों, एसकेएम ने मजदूर आंदोलनों पर ‘दमन’ की आलोचना की

श्रमिक संगठनों, एसकेएम ने मजदूर आंदोलनों पर ‘दमन’ की आलोचना की

श्रमिक संगठनों, एसकेएम ने मजदूर आंदोलनों पर ‘दमन’ की आलोचना की
Modified Date: April 28, 2026 / 10:09 pm IST
Published Date: April 28, 2026 10:09 pm IST

नयी दिल्ली, 28 अप्रैल (भाषा) केंद्रीय श्रमिक संगठनों और संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के मंच ने औद्योगिक केंद्रों में मजदूरों के विरोध प्रदर्शनों के ‘‘व्यापक दमन’’ का मंगलवार को आरोप लगाया और आगाह किया कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो राष्ट्रव्यापी आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

केंद्रीय श्रमिक संगठनों (सीटीयू) और एसकेएम के मंच ने एक संयुक्त बयान में कहा कि ज्यादा वेतन, आठ घंटे के कार्यदिवस, ओवरटाइम के लिए भुगतान और बुनियादी अधिकारों के संबंध में आंदोलन कर रहे श्रमिकों को ‘‘क्रूर पुलिस कार्रवाई, गिरफ्तारियों और मनगढ़ंत आरोपों’’ का सामना करना पड़ रहा है।

बयान में कहा गया, ‘‘श्रमिक वर्षों से लंबित वेतन वृद्धि, आठ घंटे के कार्यदिवस, ओवरटाइम भत्ते के कानूनी अधिकार, साप्ताहिक अवकाश और कार्यस्थल के बुनियादी अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं। इन मुद्दों को हल करने के बजाय, उन पर दमनकारी कार्रवाई की जा रही है।’’

तत्काल राहत उपायों की मांग करते हुए, संगठनों ने ‘‘गिरफ्तार किए गए सभी श्रमिकों की बिना शर्त रिहाई, मामले वापस लेने और श्रमिक संगठनों के नेताओं और कार्यकर्ताओं की अवैध नजरबंदी को समाप्त करने’’ का आह्वान किया।

संयुक्त मंच ने कहा कि आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भारी वृद्धि के बावजूद कई राज्यों में लगभग एक दशक से न्यूनतम मजदूरी में संशोधन नहीं किया गया है। मंच ने कहा कि औद्योगिक समूहों में कार्यबल का बड़ा हिस्सा प्रवासी श्रमिक बुनियादी सुविधाओं, नौकरी की सुरक्षा या सामाजिक संरक्षण से वंचित जीवन जी रहे हैं।

बयान में हाल के प्रदर्शनों का संदर्भ देते हुए कहा गया कि बिहार के बरौनी रिफाइनरी क्षेत्र में हजारों संविदा श्रमिकों ने विरोध प्रदर्शन किया, जिसके बाद पानीपत, सूरत, मानेसर, नोएडा, भिवाड़ी और नीमराना में भी ऐसे ही आंदोलन हुए।

बयान में कहा गया, ‘‘ये अलग-थलग घटनाएं नहीं हैं। यह देशभर में मजदूरों की साझा मांगों को लेकर शुरू हुआ व्यापक आंदोलन है जो न्यूनतम वेतन, आठ घंटे का कार्यदिवस, ओवरटाइम के लिए भुगतान, सामाजिक सुरक्षा, कार्यस्थल की सुरक्षा और गरिमा की मांग कर रहे हैं।’’

श्रमिक संगठनों ने आरोप लगाया कि मानेसर और नोएडा में पुलिस ने लाठीचार्ज किया और सैकड़ों मजदूरों को हिरासत में लिया। बयान में कहा गया, “कई मजदूरों को गिरफ्तार किया गया, उनके साथ मारपीट हुई और वे घायल हुए। परिवार उन्हें ढूंढते रहे, जबकि उन पर गंभीर धाराएं लगाई गईं और जमानत भी नहीं मिली।’’

विरोध प्रदर्शनों में ‘‘राष्ट्र-विरोधी तत्वों की संलिप्तता’’ के आरोपों को दृढ़ता से खारिज करते हुए, सीटीयू और एसकेएम ने कहा, ‘‘हम तथाकथित ‘अर्बन नक्सल’ या विदेशी साजिशों की झूठी कहानी को पूरी तरह से खारिज करते हैं। ये वास्तविक आर्थिक संकट से प्रेरित श्रमिकों के स्वतःस्फूर्त प्रदर्शन हैं।’

बयान में सरकारों पर श्रमिक आंदोलनों को बदनाम करने का आरोप लगाया गया। इसमें कहा गया, ‘‘श्रमिकों के अभूतपूर्व प्रदर्शन से घबराकर, अधिकारी दमन को उचित ठहराने के लिए दुष्प्रचार का सहारा ले रहे हैं, ठीक वैसे ही जैसे किसानों के आंदोलन के दौरान किया गया था।’’

कृषि क्षेत्र पर, एसकेएम ने कहा कि तीन कृषि कानूनों को निरस्त किए जाने के बाद भी किसानों को दिए गए आश्वासन पूरे न होने से वे अभी भी ‘धोखा’ महसूस कर रहे हैं।

बयान में कहा गया है, ‘सी2+50 प्रतिशत फॉर्मूले पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी), गारंटीकृत खरीद, ऋण माफी और फसल हानि के मुआवजे सहित प्रमुख मांगें अभी भी अनसुलझी हैं।’’ इसमें अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौतों पर भी चिंता व्यक्त की गई है, जिन्हें ‘राष्ट्रीय हितों और आत्मनिर्भरता के लिए हानिकारक’ बताया गया है।

सीटीयू और एसकेएम ने घोषणा की है कि वे 13 मई को नयी दिल्ली में एक संयुक्त बैठक करेंगे ताकि ‘‘कार्य योजना को अंतिम रूप दिया जा सके’’ और आंदोलन को और तेज किया जा सके। उन्होंने देश भर के किसानों से एक मई को मई दिवस जुलूसों में शामिल होने की अपील भी की।

भाषा आशीष माधव

माधव


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