टीटीएएडीसी चुनाव: भाजपा के घोषणापत्र में कोकबोरोक को मान्यता देने का वादा

टीटीएएडीसी चुनाव: भाजपा के घोषणापत्र में कोकबोरोक को मान्यता देने का वादा

टीटीएएडीसी चुनाव: भाजपा के घोषणापत्र में कोकबोरोक को मान्यता देने का वादा
Modified Date: April 5, 2026 / 03:11 pm IST
Published Date: April 5, 2026 3:11 pm IST

अगरतला, पांच अप्रैल (भाषा) त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने 12 अप्रैल को होने वाले आदिवासी परिषद चुनाव के लिए रविवार को भाजपा का घोषणापत्र जारी किया।

भाजपा द्वारा जारी घोषणापत्र में कोकबोरोक भाषा को मान्यता देने, मुख्यालय खुमुलवंग के लिए एक सुनियोजित योजना, एक फुटबॉल अकादमी और एक मेडिकल कॉलेज का वादा किया गया है।

त्रिपुरा आदिवासी क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद (टीटीएएडीसी) के 28 सदस्यीय चुनाव के लिए मतदान 12 अप्रैल को होगा और मतगणना 17 अप्रैल को निर्धारित है।

साहा ने पश्चिम त्रिपुरा जिले के खुमुलवंग में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि टिपरा मोथा द्वारा संचालित टीटीएडीसी में भ्रष्टाचार के आरोप हैं और अगर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) आदिवासी परिषद में सत्ता में आती है, तो वह ‘अनैतिक प्रथाओं’ के खिलाफ कार्रवाई करेगी।

पार्टी ने अपने घोषणापत्र में टीटीएडीसी का नाम बदलकर त्रिपुरा स्वायत्त प्रादेशिक परिषद (टीएटीसी) करने, कोकबोरोक और अन्य आदिवासी भाषाओं को उचित मान्यता देने और आदिवासी समाजों के पारंपरिक कानूनों और परंपराओं को संरक्षित करने के लिए कदम उठाने का वादा किया।

पार्टी ने एक मेडिकल कॉलेज स्थापित करने, आदिवासी परिषद के मुख्यालय खुमुलवंग के लिए एक मास्टर प्लान तैयार करने, मुख्यमंत्री रबर मिशन को इस क्षेत्र तक विस्तारित करने और एक आधुनिक फुटबॉल अकादमी स्थापित करने का भी वादा किया।

राज्य में सत्ताधारी पार्टी ने आदिवासी लड़के-लड़कियों को रोजगार दिलाने के लिए उन्हें कौशल प्रशिक्षण देने का भी वादा किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर पार्टी को आदिवासी परिषद चलाने का जनादेश मिलता है, तो भाजपा का लक्ष्य आदिवासी क्षेत्रों में विकास की गति को तेज करना होगा।

उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने पिछले मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में रियांग शरणार्थी शिविरों में सौर पैनल की स्थापना और जम्पाई पहाड़ियों में पेयजल आपूर्ति की प्रशंसा की थी। हम हमेशा विकास पर ध्यान केंद्रित करते हैं, चाहे मैदानी क्षेत्र हो या पहाड़ी क्षेत्र।’’

भाषा अमित दिलीप

दिलीप


लेखक के बारे में