नयी दिल्ली, नौ जनवरी (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने तुर्कमान गेट इलाके में एक मस्जिद के पास अतिक्रमण के खिलाफ अभियान के दौरान हिंसा मामले में शुक्रवार को आठ लोगों को 12 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
इसी मामले के पांच अन्य आरोपियों ने न्यायिक मजिस्ट्रेट सायशा चड्ढा की अदालत में जमानत याचिका दायर की है। उनके वकीलों ने आरोप लगाया कि जेल परिसर के भीतर अधिकारियों ने उनके साथ मारपीट की है।
अदालत ने इस पर जेल अधीक्षक को नोटिस जारी कर अगली सुनवाई से पहले पांचों आरोपियों का मेडिकल रिकॉर्ड पेश करने का निर्देश दिया।
हिंसा के संबंध में अब तक एक किशोर सहित कुल 13 लोगों को पकड़ा गया है। मजिस्ट्रेट अदालत के समक्ष शुक्रवार को पेश किए गए आठ आरोपियों को 21 जनवरी तक के लिए जेल भेज दिया गया। अदालत ने पाया कि हिंसा स्थल पर इन आरोपियों की मौजूदगी प्रथम दृष्टया स्पष्ट है।
सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने बताया कि सभी गिरफ्तारियां सीसीटीवी फुटेज और पुलिसकर्मियों द्वारा पहचान के आधार पर की गई हैं। पुलिस ने इन आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 109 (हत्या का प्रयास) सहित दंगा करने और लोक सेवकों के काम में बाधा डालने जैसी धाराएं लगाई हैं।
पुलिस ने दलील दी कि पथराव में छह पुलिसकर्मी घायल हुए हैं, जिनमें से कुछ के सिर और महत्वपूर्ण अंगों में चोटें आई हैं।
मंगलवार रात रामलीला मैदान के पास फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास अतिक्रमण विरोधी अभियान के दौरान हिंसा भड़क उठी थी।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, मस्जिद गिराए जाने की सोशल मीडिया पर अफवाह के बाद भीड़ जमा हुई और पुलिस व नगर निगम कर्मियों पर पथराव किया गया।
निगम आयुक्त विवेक कुमार ने कहा कि अभियान में 36,000 वर्ग फुट क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त कराया गया और मस्जिद को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया गया है।
भाषा
सुमित अविनाश
अविनाश