नयी दिल्ली, नौ अगस्त (भाषा) मानसून सत्र के अब केवल चार कार्य दिवस बचे हैं, लेकिन संसद में जारी गतिरोध के बीच महिला आरक्षण, परिसीमन और विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयकों को लेकर अब भी अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है।
इनमें से कोई भी विधेयक सोमवार को लोकसभा की कार्यसूची में शामिल नहीं है।
सरकार की ओर से संपर्क साधे जाने के बाद कुछ विपक्षी दलों ने महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयकों को लेकर अपने रुख में नरमी के संकेत दिए हैं, लेकिन कांग्रेस और उसके ज्यादातर सहयोगियों ने इन विधेयकों तथा एफसीआरए संशोधन विधेयक को लाने के किसी भी कदम का विरोध करने का संकल्प लिया है।
कांग्रेस के संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने रविवार को कहा कि अगर केंद्र सरकार संसद में प्रस्तावित एफसीआरए विधेयक पेश करती है, तो कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इसका पुरजोर तरीके से विरोध करेंगे।
उन्होंने कहा,‘‘अगर केंद्र सरकार को लगता है कि वह इन दो-तीन दिनों में विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन अधिनियम (एफसीआरए) विधेयक तैयार करके पेश कर सकती है, तो उसे यह इच्छा अपने तक ही रखनी चाहिए।’’
वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित कानून अल्पसंख्यकों और गैर सरकारी संगठनो (एनजीओ) को निशाना बनाता है और कहा कि विपक्ष इसे पारित नहीं होने देगा।
वेणुगोपाल ने केरल के अलप्पुझा में पत्रकारों से कहा, ‘‘अगर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस जन-विरोधी विधेयक को पारित कराने आते भी हैं, तो इसमें कोई शक नहीं कि उन्हें संसद में कड़े विरोध का सामना करना पड़ेगा। यह विधेयक असंवैधानिक और जन-विरोधी है। हम ऐसे जन-विरोधी और असंवैधानिक विधेयक को पारित नहीं होने देंगे।’’
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने रविवार को याद दिलाया कि 2023 में संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान कैसे रिकॉर्ड संख्या में 146 सांसदों को निलंबित किया गया था और विपक्षी सदस्यों की नाममात्र मौजूदगी में कई अहम विधेयक पारित किए गए थे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि “इतिहास दोहराया नहीं जाना चाहिए।”
पिछले सप्ताह सरकार ने महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयकों के लिए विपक्ष के साथ-साथ अपने सहयोगी दलों का समर्थन जुटाने के उद्देश्य से कई बार उनसे संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उसे उसमें ज्यादा सफलता नहीं मिली।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने गतिरोध खत्म करने के प्रयास में कांग्रेस नेता राहुल गांधी से दो बार मुलाकात की थी। मंत्री ने गांधी से फोन पर भी बातचीत की थी।
सूत्रों के अनुसार, जब रीजीजू ने महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयकों को पारित कराने के लिए कांग्रेस का समर्थन मांगा, तो लोकसभा में विपक्ष के नेता ने प्रस्तावित विधेयकों पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने पर जोर दिया।
द्रमुक नेता उदयनिधि स्टालिन ने शुक्रवार को एक टीवी समाचार चैनल से कहा था कि उनकी पार्टी ने न तो अतीत में परिसीमन विधेयक का समर्थन किया है और न ही भविष्य में करेगी।
शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने हालांकि शनिवार को महिला आरक्षण विधेयक और राज्यों के लिए सीटों में समान रूप से 50 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रावधान करने वाले परिसीमन विधेयकों को अपना समर्थन दिया था।
राकांपा (शप) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने शनिवार को कहा था कि परिसीमन विधेयक पर टिप्पणी करना अभी जल्दबाजी होगी। उन्होंने कहा था, ‘‘जब यह विधेयक आएगा, तब हम अपने गठबंधन सहयोगियों के साथ हर विधेयक पर चर्चा करेंगे।’’
कांग्रेस ने शुक्रवार को लोकसभा और राज्यसभा के अपने सदस्यों को व्हिप जारी कर कहा था कि वे अगले सप्ताह के दौरान संसद में महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा को देखते हुए सदन में मौजूद रहें तथा पार्टी के रुख का समर्थन करें।
सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस ने विपक्ष के अपने सहयोगी दलों से भी कहा है कि वे भी अपने सांसदों को सदन में मौजूद रहने के लिए कहें।
सोमवार के लिए लोकसभा की कार्यसूची में चार विधेयकों को शामिल किया गया है जिनमें न्यायाधिकरण सुधार विधेयक, 2026; खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026; केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026; और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 शामिल हैं।
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देवेंद्र नरेश
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