नयी दिल्ली, 26 फरवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने यहां अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) को निर्देश दिया है कि वह उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में 10 साल की जेल की अपनी सजा को चिकित्सकीय आधार पर निलंबित करने का आग्रह कर रहे जयदीप सेंगर के स्वास्थ्य के परीक्षण के लिए एक मेडिकल बोर्ड का गठन करें।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से निष्कासित नेता कुलदीप सेंगर के भाई जयदीप सेंगर (50) ने मुंह के कैंसर के चौथा चरण और संभावित पुनरावृत्ति के कारण राहत का आग्रह किया।
कुलदीप सेंगर को नाबालिग लड़की से दुष्कर्म किए जाने का दोषी ठहराया गया था।
न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रवींद्र डुडेजा की पीठ ने टिप्पणी की कि जयदीप सेंगर की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति का आकलन करने के लिए एक स्वतंत्र चिकित्सकीय परीक्षण आवश्यक है।
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने याचिका का विरोध किया और तर्क दिया कि दोषी द्वारा अपनी याचिका के समर्थन में प्रस्तुत किए गए चिकित्सा दस्तावेज फर्जी हैं।
पीठ ने 24 फरवरी को आदेश दिया, ‘‘चिकित्सा कारणों से सजा के निलंबन से संबंधित मामलों में न्यायालय को विश्वसनीय और निष्पक्ष चिकित्सा राय तथा दस्तावेजों द्वारा ही निर्देश देने चाहिए। वर्तमान मामले में न्यायालय का मत है कि आवेदक की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति का पता लगाने के लिए विधिवत गठित चिकित्सा बोर्ड द्वारा स्वतंत्र चिकित्सा परीक्षण आवश्यक है। तदनुसार, यह निर्देश दिया जाता है कि एम्स नयी दिल्ली के निदेशक आवेदक की वर्तमान चिकित्सकीय स्थिति की जांच करने के लिए एक चिकित्सा बोर्ड का गठन करें।’’
मृतक की बेटी के अधिवक्ता ने जयदीप सेंगर की सजा को अंतरिम तौर पर निलंबित किए जाने का विरोध किया और आशंका जताई कि वह अपनी स्वतंत्रता का दुरुपयोग करेगा।
मामले की सुनवाई दो मार्च को तय करते हुए अदालत ने बोर्ड से एक व्यापक परीक्षण करने और इस बारे में एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा कि क्या जयदीप सेंगर कैंसर या किसी अन्य जानलेवा बीमारी से पीड़ित हैं।
भाषा यासिर पवनेश
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