जयपुर, 27 मई (भाषा) राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने बुधवार को कहा कि विधि शिक्षा सीधे तौर पर समाज से जुड़ी शिक्षा है और विद्यार्थी इसका उपयोग जरूरतमंदों, पीड़ित और वंचित वर्ग के कल्याण के लिए करें।
उन्होंने इसके साथ ही विधि शिक्षा में राष्ट्र और समाज हितों को सदा अग्रणी रखने का आह्वान किया।
बागडे, यहां डॉ. भीमराव आंबेडकर विधि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह को सम्बोधित कर रहे थे।
राज्यपाल ने डॉ. आंबेडकर को याद करते हुए कहा कि वर्ष 1938 में उन्होंने (डॉ. आंबे़डकर) कहा था, “मैं चाहता हूं कि समस्त लोग पहले भारतीय हों और अंततः भारतीय हों तथा भारतीय के सिवाय व कुछ भी नहीं हों। उन्होंने कहा था कि विधि शिक्षा का भी मूल यही होना चाहिए कि सबसे पहले हम भारतीय हैं, उसके बाद किसी वर्ग, जाति या समुदाय से आते हैं। देश सर्वोच्च है।”
बयान के अनुसार, बागडे ने कहा कि स्वतंत्र भारत के प्रथम कानून मंत्री के पद पर रहते हुए बाबा साहेब ने वंचित वर्गों के अधिकारों, ऊंच-नीच का भेद मिटा कर समानता स्थापित करने वाले कानून पारित करवाए।
उन्होंने कहा कि विधि शिक्षा में भारतीय सभ्यता और संस्कृति के साथ शब्द संपदा को गंभीरता से लेकर अगर आगे बढ़ेंगे तो सभी क्षेत्रों में सफलता मिलेगी।
राज्यपाल ने विरोध के नाम पर गाली देने की परम्परा को संविधान के विरुद्ध बताते हुए कहा कि बोले गए शब्द कभी वापस नहीं आते इसलिए बोलने में सदा सजगता रखनी चाहिए।
केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि डॉ. आंबेडकर विधि विशेषज्ञ ही नहीं थे वह बहुत बड़े अर्थशास्त्री, मनोवैज्ञानिक, लेखक और विविध विषयों के जानकार थे।
उन्होंने कहा, “देश के पहले कानून मंत्री डॉ. आंबेडकर थे और मुझे इस बात का गर्व है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मुझे उसी परंपरा में देश का कानून मंत्री बनाया है।”
मेघवाल ने कहा कि अंग्रेजों को भारतीय नागरिकों को दंड देना था इसलिए दंड संहिता कानून बनाए जबकि प्रधानमंत्री मोदी की मंशा यह है कि राष्ट्र के नागरिकों को न्याय मिले इसलिए पुराने कानून बदल कर देश में भारतीय न्याय संहिता की पहल की गई।
उपमुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने में कानून एवं न्याय की शिक्षा ही सबसे महत्वपूर्ण है।
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