हत्या के दोषी को समयपूर्व रिहाई की राहत नहीं मिली, उच्च न्यायालय ने अपराध को बताया अत्यंत क्रूर

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हत्या के दोषी को समयपूर्व रिहाई की राहत नहीं मिली, उच्च न्यायालय ने अपराध को बताया अत्यंत क्रूर

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  • Publish Date - July 25, 2026 / 01:43 PM IST,
    Updated On - July 25, 2026 / 01:43 PM IST

मुंबई, 25 जुलाई (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय ने शादी का प्रस्ताव ठुकराने पर एक महिला की हत्या के दोषी को सजा में छूट देकर समय से पहले रिहा करने से इनकार करने के महाराष्ट्र सरकार के फैसले को बरकरार रखा है।

अदालत ने कहा कि यह हत्या असाधारण हिंसा और क्रूरता के साथ की गई थी।

न्यायमूर्ति सारंग कोतवाल और न्यायमूर्ति आशीष चव्हाण की पीठ ने 20 जुलाई को कहा कि अजय किसान डुंगरशी को उस श्रेणी में रखना सही था जिसके तहत सजा में छूट सहित कारावास की अवधि 26 वर्ष निर्धारित है।

उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘यह अपराध असाधारण हिंसा और क्रूरता के साथ किया गया है।’’

याचिकाकर्ता ने महाराष्ट्र सरकार के सितंबर 2025 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसे ऐसी श्रेणी में रखने से इनकार कर दिया गया था, जिसके तहत कुछ दोषियों को समय से पहले सजा में छूट का लाभ मिल सकता है।

डुंगरशी का दावा था कि छूट सहित उसकी सजा की अवधि 22 वर्ष मानी जानी चाहिए और उसे समय से पहले रिहा किया जाना चाहिए।

हालांकि, राज्य सरकार ने उसे श्रेणी 2(सी) में रखा, जिसके अनुसार यदि अपराध असाधारण हिंसा, क्रूरता या पीड़ित की जलने से मृत्यु से जुड़ा हो, तो सजा में छूट सहित कारावास की अवधि 26 वर्ष होगी।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, डुंगरशी ने महिला की हत्या इसलिए की थी क्योंकि उसने उससे शादी करने से इनकार कर दिया था।

उच्च न्यायालय ने कहा कि महिला के शरीर पर चाकू के कई गहरे घाव पाए गए थे इसलिए याचिकाकर्ता का मामला सरकार के प्रस्ताव की श्रेणी 2(सी) के अंतर्गत ही आता है।

भाषा गोला सिम्मी

सिम्मी