दिल्ली के प्रधानमंत्री संग्रहालय में जल्द ही महात्मा गांधी और वाजपेयी के जीवंत ‘एआई अवतार’ नजर आएंगे
दिल्ली के प्रधानमंत्री संग्रहालय में जल्द ही महात्मा गांधी और वाजपेयी के जीवंत ‘एआई अवतार’ नजर आएंगे
(तस्वीर के साथ)
(कुणाल दत्त)
नयी दिल्ली, 26 अप्रैल (भाषा) दिल्ली के प्रधानमंत्री संग्रहालय में आने वाले आगंतुक जल्द ही महात्मा गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी के एआई से बने ‘‘अति-यथार्थवादी 3डी अवतारों’’ के साथ संवाद कर सकेंगे।
इन दोनों प्रख्यात नेताओं को उनके एआई अवतारों में लाने की परियोजना ‘‘अंतिम चरण’’ में है, और यह पिछले सितंबर में सरदार वल्लभभाई पटेल पर पहली एआई-संचालित संवादपरक प्रदर्शनी की शुरुआत को मिली अच्छी प्रतिक्रिया के बाद शुरू की गई है।
प्रधानमंत्री संग्रहालय एवं पुस्तकालय (पीएमएमएल) के निदेशक अश्विनी लोहानी ने ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ साक्षात्कार में कहा, ‘‘हम संग्रहालय में आगंतुकों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का व्यापक उपयोग करने पर काम कर रहे हैं। हमने सरदार पटेल के आदमकद ‘एआई-संचालित होलोबॉक्स’ से शुरुआत की, और फिर पूर्व राष्ट्रपति ए पी जे अब्दुल कलाम के एआई-संचालित होलोबॉक्स को पेश किया गया। जल्द ही, हम गांधी जी और अटल जी के भी इसी तरह के एआई अवतार पेश करेंगे।’’
परियोजना की स्थिति के बारे में पूछे जाने पर लोहानी ने कहा कि यह वर्तमान में अपने अंतिम चरण में है और इस वर्ष मई के अंत तक इसके शुरू होने की उम्मीद है।
प्रधानमंत्री संग्रहालय ने 14 अप्रैल को अपने चार साल पूरे किए हैं।
पीएमएमएल के निदेशक ने ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ एक विशेष बातचीत में संग्रहालय के लिए कुछ अन्य योजनाओं के बारे में भी बताया, जहां प्रतिदिन औसतन 1,400-1,500 लोग आते हैं।
सरकार द्वारा दिल्ली में एक पर्यटन स्थल के रूप में व्यापक रूप से प्रचारित इस संग्रहालय में एक ऐतिहासिक इमारत शामिल है, जिसका निर्माण मूल रूप से 1929-30 में भारत में ब्रिटिश सैन्य बलों के तत्कालीन कमांडर-इन-चीफ के निवास के रूप में किया गया था और ये बाद में पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का निवास स्थान बन गया। इस इमारत में 2022 में बने एक आधुनिक परिसर में कई गैलरी हैं, जिनमें भारत के सभी प्रधानमंत्रियों की विरासत को दर्शाने वाली गैलरी भी शामिल है।
पिछले चार वर्षों में पीएमएमएल की यात्रा के बारे में पूछे जाने पर लोहानी ने कहा, ‘‘यह शानदार रहा है। पीएमएमएल दुनिया के अपनी तरह के अनूठे संग्रहालयों में से एक है। अब कई आगंतुक आने लगे हैं और हम प्रौद्योगिकी के उपयोग को और अधिक बढ़ा रहे हैं। यह संग्रहालय वास्तव में लोकतंत्र की अवधारणा को सुदृढ़ करता है, जो इसका मूल विषय है।’’
उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में 64 लाख से अधिक लोगों ने संग्रहालय का दौरा किया, जो इसकी बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है।
आगंतुकों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए एआई को कितना एकीकृत किया गया है, इस बारे में पूछे जाने पर लोहानी ने कहा कि पिछले साल 17 सितंबर को सरदार पटेल के ‘एआई-संचालित होलोबॉक्स’ की शुरुआत के बाद, अब गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी के एआई अवतारों को जल्द ही पेश किया जाएगा।
उन्होंने कहा, ‘‘हम संग्रहालय में पहुंच में सुधार के लिए भी एआई का उपयोग करने पर विचार कर रहे हैं।’’
पीएमएमएल के निदेशक ने कहा, ‘‘हम एक स्टार्टअप के साथ काम कर रहे हैं जिसने हाल ही में दिल्ली में आयोजित एआई शिखर सम्मेलन में भाग लिया था। एक परियोजना के तहत एआई-आधारित तकनीक से लैस और उससे जुड़े ‘स्मार्ट ग्लास’ के उपयोग की संभावनाओं का पता लगाया जा रहा है, जो दृष्टिबाधित आगंतुक के लिए व्यक्तियों या वस्तुओं का वर्णन करेगा और एक गैजेट के माध्यम से वे इसे सुन सकेंगे।’’
लोहानी के मुताबिक, संग्रहालय की नयी इमारत में, आगंतुक देश की कुछ प्रमुख अवसंरचना परियोजनाओं के ऊपर एक ‘हेलीकॉप्टर की रोमांचक सवारी’ का भी आनंद ले सकते हैं।
इसके तहत एक पांच सीटों वाली व्यवस्था है, जिसमें ग्राफिक दृश्य शामिल हैं जो अंदर बैठे लोगों को ऐसा महसूस कराते हैं जैसे वे इन परियोजनाओं के स्थल के ऊपर मंडरा रहे हों, जिनमें हिमाचल प्रदेश में अटल सुरंग और जम्मू-कश्मीर में चिनाब पुल शामिल हैं।
नयी इमारत में, आगंतुक नेहरू से लेकर नरेन्द्र मोदी तक किसी भी प्रधानमंत्री के साथ ‘‘फोटो खिंचवाने’’ का विकल्प चुन सकते हैं, क्योंकि अत्याधुनिक तकनीक आगंतुक के बगल में बैठे प्रधानमंत्री की एक यथार्थवादी छवि जोड़ती है, जिसे बूथ पर तैनात कर्मचारी द्वारा आगंतुक को ईमेल द्वारा भेज दिया जाता है।
भाषा शफीक रंजन
रंजन

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