शिमला में पानी की किल्लत शायद अब गुजरे जमाने की बात हो जाएगी, एक बड़ी परियोजना की शुरुआत जल्द
शिमला में पानी की किल्लत शायद अब गुजरे जमाने की बात हो जाएगी, एक बड़ी परियोजना की शुरुआत जल्द
(भानु पी लोहुमी)
शिमला, आठ मार्च (भाषा) सतलुज नदी से बड़ी मात्रा में पानी की आपूर्ति करने वाली परियोजना रविवार को करीब-करीब पूरी होती दिखी जिसके कारण इस गर्मी में शिमला में शायद पानी की भारी किल्लत नहीं होगी।
पिछले तीन महीनों से जारी अंतिम परीक्षण के पूरा होने के बाद, पानी आज राज्य की राजधानी के संजौली जलाशय में पहुंच गया।
स्थानीय विधायक हरीश जनार्थ ने कहा कि परियोजना का औपचारिक उद्घाटन जल्द किया जाएगा।
शिमला जल प्रबंधन निगम लिमिटेड (एसजेपीएनएल) के महाप्रबंधक (संचालन) राजेश कश्यप ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि इस परियोजना का उद्देश्य जल आपूर्ति क्षमता को बढ़ाकर 107 मेगालीटर प्रति दिन (एमएलडी) करना है।
वर्तमान में शिमला शहर को पांच योजनाओं – गुम्मा, गिरि, चुरत, चीर और अश्वनी खड़ से लगभग 40 एमएलडी पानी मिलता है।
इस परियोजना के तहत जल शोधन के लिए पहली बार ओजोन तकनीक का उपयोग किया जाएगा। पाइपलाइन को एंकर पर उठाकर, काटे जाने के लिए स्वीकृत 1,330 पेड़ों में से आधे पेड़ों को बचा लिया गया।
कश्यप ने बताया कि शुरुआत में यह योजना 42 एमएलडी पानी उपलब्ध कराएगी और 15 साल बाद क्षमता को बढ़ाकर 67 एमएलडी कर दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि परियोजना का स्रोत सुन्नी के शिक्रोडी में है। पानी को शिक्रोडी-द्वादा-दुम्मी के रास्ते तीन चरणों में भेजा जाएगा। इसके तहत 27.3 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के माध्यम से पानी संजौली जलाशय तक पहुंचेगा।
अक्टूबर 2020 में शुरू हुई इस हरित परियोजना के तहत मूल रूप से 1,330 पेड़ों की कटाई की जानी थी, लेकिन ‘एंकर’ और ‘थ्रस्ट ब्लॉक’ पर पाइपलाइन बिछाकर लगभग 700 पेड़ों को बचा लिया गया।
अधिकारियों ने बताया कि पाइप का व्यास 750 मिमी है और यह अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट (एपीआई) के मानकों को पूरा करता है। उन्होंने यह भी बताया कि इस परियोजना के तहत इमारतों और टैंकों पर लगाए गए पैनल के माध्यम से 500 किलोवाट सौर ऊर्जा उत्पन्न की जाएगी।
भाषा संतोष नरेश
नरेश

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