पश्चिम बंगाल: नौकरियां गंवाने वाले शिक्षकों ने शिक्षा विभाग मुख्यालय का घेराव किया
पश्चिम बंगाल: नौकरियां गंवाने वाले शिक्षकों ने शिक्षा विभाग मुख्यालय का घेराव किया
कोलकाता, 15 मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद बेरोजगार हुए पश्चिम बंगाल के हजारों स्कूली शिक्षकों ने बृहस्पतिवार को राज्य के शिक्षा विभाग के मुख्यालय का घेराव किया और सरकार से उनकी सेवाओं को बहाल करने के लिए कानूनी कदम उठाने की मांग की।
जब प्रदर्शनकारियों ने विकास भवन के सामने एकत्र होकर साल्ट लेक के व्यस्त करुणामयी इलाके में यातायात बाधित किया, तो पुलिस कर्मियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की। हालांकि, प्रदर्शनकारियों का एक वर्ग दीवार फांदकर विकास भवन के परिसर में घुस गया।
शिक्षकों ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से तत्काल बातचीत का आह्वान किया और मांग की कि राज्य सरकार कानूनी कदम उठाए ताकि वे तीन अप्रैल के उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद गंवाई गई नौकरी वापस पा सकें।
प्रदर्शनकारी शिक्षकों के एक समूह के प्रवक्ता शुभंकर घोषाल ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘जब तक सरकार सभी योग्य शिक्षकों की नौकरियों को स्थायी करने के लिए कानूनी कदम नहीं उठाती, हम यहां से नहीं हटेंगे। हम मांग करते हैं कि सरकार हमें उच्चतम न्यायालय में दायर की जाने वाली समीक्षा याचिका में पक्ष बनाए, क्योंकि हम भी हितधारक हैं।’
विरोध प्रदर्शन का आयोजन करने वाले फोरम के एक अन्य सदस्य महबूब मंडल ने कहा कि कोई भी प्रदर्शनकारी शिक्षक दोबारा भर्ती परीक्षा नहीं देगा।
मंडल ने कहा, ‘क्या एसएससी के चेयरमैन और अन्य अधिकारी वही परीक्षाएं देंगे जो उन्होंने पहले उत्तीर्ण की थीं? क्या शिक्षा मंत्री तय तिथि से पहले फिर से चुनाव लड़ेंगे? हम जानते हैं कि एसएससी को अदालत के आदेश का पालन करना है। लेकिन सिस्टम को उच्चतम न्यायालय द्वारा दूषित करार दिए जाने के लिए वे ही जिम्मेदार हैं। इस मुद्दे को सुलझाना उनका कर्तव्य है।”
राज्य प्रायोजित और सहायता प्राप्त स्कूलों के कुल 25,753 शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को तीन अप्रैल के उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा था। उच्चतम न्यायालय ने 2016 की भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं पाने के बाद पूरे पैनल को रद्द कर दिया था।
भाषा जोहेब पवनेश
पवनेश

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