रिम्स की हालत खराब होने पर आप जनता की क्या सेवा कर पाएंगे: उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से पूछा

रिम्स की हालत खराब होने पर आप जनता की क्या सेवा कर पाएंगे: उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से पूछा

रिम्स की हालत खराब होने पर आप जनता की क्या सेवा कर पाएंगे: उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से पूछा
Modified Date: November 29, 2022 / 08:36 pm IST
Published Date: September 4, 2020 4:25 pm IST

रांची, चार सितंबर (भाषा) झारखंड उच्च न्यायालय ने राज्य के सबसे बड़े अस्पताल राजेन्द्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) की व्यवस्था और चिकित्सकों एवं नर्सों की संख्या को लेकर शुक्रवार को राज्य सरकार से पूछा कि अस्पताल की हालत खराब होने पर वह राज्य की जनता की क्या सेवा कर पाएगी?

रिम्स की व्यवस्था पर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डॉ रवि रंजन और न्यायमूर्ति एसके द्विवेदी की पीठ ने यह टिप्पणी की।

पीठ ने कहा कि कोरोना संक्रमण के दौरान नर्स और चिकित्सक बेहतर काम कर रहे हैं, लेकिन प्रबंधन की कमी के चलते रिम्स के हालात बदतर हो गए हैं जहां स्थायी निदेशक नहीं है।

सुनवाई के दौरान पीठ ने सरकार से कहा कि रिम्स राज्य का सबसे बड़ा अस्पताल है जहां पूरे राज्य के मरीज अपना इलाज कराने पहुंचते हैं, लेकिन रिम्स की हालत खराब होने पर ‘‘आप जनता की क्या सेवा कर पाएंगे?’’

पीठ ने कहा कि कोरोना संक्रमण से लड़ने के लिए चिकित्सक-नर्स दिन रात मेहनत कर रहे हैं लेकिन उनकी संख्या कम है, क्योंकि रिक्त पदों पर नियुक्ति ही नहीं की जा रही है। इसकी वजह से मरीजों को परेशानी हो रही है।

इस दौरान अधिवक्ता धीरज कुमार ने कहा कि प्लाज्मा दान करने के लिए रिम्स में मशीन तो लगा दी गई है, लेकिन उसको चलाने वाले तकनीशियन और सहयोग करने वाले कर्मचारियों की कमी के चलते काम में देरी हो रही है।

इसके बाद पीठ ने रिम्स और सरकार से पूरे अस्पताल के सभी विभागों के रिक्त पदों और सृजित पदों की विस्तृत जानकारी मांगी।

पीठ ने इस मामले में स्वास्थ्य सचिव को शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है।

उच्च न्यायालय ने रिम्स निदेशक की पूर्णकालिक नियुक्ति और रिक्त पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया की पूरी जानकारी राज्य सरकार से मांगी।

पीठ ने सरकार से पूछा कि रिम्स में पूर्णकालिक निदेशक की नियुक्ति में इतनी देरी क्यों हो रही है? प्रभारी निदेशक कई अहम मामलों में फैसले नहीं ले सकते हैं। इसलिए जल्द से जल्द निदेशक की नियुक्ति होनी चाहिए।

मामले में अगली सुनवाई 25 सितंबर को होगी।

भाषा, इन्दु

शोभना नेत्रपाल

नेत्रपाल


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