जामा मस्जिद खंडहरों पर बनी है या खाली जमीन पर, हमारे पास कोई रिकॉर्ड नहीं: एएसआई ने सीआईसी से कहा
जामा मस्जिद खंडहरों पर बनी है या खाली जमीन पर, हमारे पास कोई रिकॉर्ड नहीं: एएसआई ने सीआईसी से कहा
(मोहित सैनी)
नयी दिल्ली, दो मार्च (भाषा) भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) को बताया है कि उसके पास ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं है जिससे यह पता चले कि संभल स्थित जामा मस्जिद का निर्माण किसी पूर्व संरचना को ध्वस्त कर किया गया था या किसी खाली जमीन पर किया गया था। इसने यह भी कहा कि न ही उसके पास ऐसे दस्तावेज हैं जो इसके निर्माण के समय भूमि मालिक की पहचान करते हों।
सत्यप्रकाश यादव ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत यह जानना चाहा कि क्या मुगल काल की मस्जिद, जामा मस्जिद, किसी खंडहर को ध्वस्त करके या खाली जमीन पर बनाई गई थी। उन्होंने इसके साथ ही उस समय के भूस्वामी का नाम और स्वामित्व अधिकार प्रदान करने वाले दस्तावेजों के बारे में भी जानकारी मांगी थी।
एएसआई ने अपने जवाब में कहा कि ‘‘इस कार्यालय में ऐसी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है’’।
संबंधित स्थल को संरक्षण में लेने के समय वहां मौजूद निर्माणों की प्रकृति, बाद में किए गए किसी भी नए निर्माण और मस्जिद से जुड़े पिछले विवादों से संबंधित प्रश्नों पर, एएसआई ने कहा कि ऐसी जानकारी उसके रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं है।
हालांकि, पहली अपील की कार्यवाही के दौरान, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने 2018 की एक घटना का हवाला देते हुए कहा कि केंद्र द्वारा संरक्षित स्मारक के एक खास क्षेत्र के भीतर किसी भी नए निर्माण की अनुमति नहीं है। इसने कहा कि उस वर्ष जामा मस्जिद स्थल पर स्टील की एक ‘‘अवैध’’ रेलिंग लगाई जा रही थी और विभाग ने काम रोकने के आदेश जारी किए थे।
आवेदक ने मस्जिद के निर्माण की अवधि के बारे में भी पूछा था। एएसआई ने जवाब दिया कि उसके अभिलेखों के अनुसार, जामा मस्जिद संभल का निर्माण वर्ष 1526 में हुआ था। इसने सहायक सामग्री का हवाला दिया।
इस सवाल पर कि क्या इस इमारत को पहले किसी और नाम से जाना जाता था, विभाग ने कहा कि एएसआई द्वारा इस मस्जिद को इसी नाम से संरक्षित किया गया है।
संरचना की वर्तमान स्थिति के बारे में पूछे जाने पर एएसआई ने कहा, ‘‘वर्तमान में, यह एक मस्जिद के रूप में मौजूद है।’’
इसने एक राजपत्र अधिसूचना का हवाला देते हुए कहा कि 1920 में जामा मस्जिद को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षण में ले लिया गया था।
आयोग के समक्ष सुनवाई के दौरान, अपीलकर्ता ने तर्क दिया कि अनुपलब्धता के आधार पर महत्वपूर्ण जानकारी देने से इनकार कर दिया गया। एएसआई ने यह दावा किया कि उसने रिकॉर्ड में उपलब्ध सभी जानकारी प्रदान कर दी है और उसे ऐसी जानकारी एकत्र करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता जो उसके पास मौजूद नहीं है।
एएसआई के रुख का समर्थन करते हुए आयोग ने पाया कि आरटीआई अधिनियम सार्वजनिक प्राधिकरणों को केवल मौजूदा रिकॉर्ड प्रकट करने के लिए बाध्य करता है और उन्हें नयी जानकारी उत्पन्न करने के लिए बाध्य नहीं करता।
इसने न्यायिक मिसालों का हवाला देते हुए जोर दिया कि सार्वजनिक प्राधिकरण के पास अनुपलब्ध जानकारी को उपलब्ध कराने का निर्देश नहीं दिया जा सकता।
संभल जामा मस्जिद अपने इतिहास को लेकर कानूनी विवाद के केंद्र में है, क्योंकि एक याचिका में दावा किया गया है कि मस्जिद का निर्माण एक प्राचीन हिंदू मंदिर के ऊपर किया गया था। 24 नवंबर, 2024 को संभल में अदालत के मस्जिद संबंधी एएसआई सर्वेक्षण के आदेश के विरोध में हुए दंगों के बाद इस मुद्दे ने व्यापक ध्यान आकर्षित किया। इस हिंसा में चार लोगों की मौत हुई थी और पुलिसकर्मियों सहित कई लोग घायल हो गए थे।
आयोग ने हस्तक्षेप करने का कोई आधार न पाते हुए, अपील खारिज कर दी और कहा कि एएसआई के जवाब कानून के अनुसार है, जिसमें यह बयान भी शामिल है कि उसके पास इस बात का कोई रिकॉर्ड नहीं है कि मस्जिद खंडहरों पर बनी है या खाली जमीन पर।
भाषा
नेत्रपाल अविनाश
अविनाश
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