सरकार को ट्रांसजेंडर समुदाय से संबंधित विधेयक हड़बड़ी में लाने की क्या जरूरत थी: विपक्षी सांसद

सरकार को ट्रांसजेंडर समुदाय से संबंधित विधेयक हड़बड़ी में लाने की क्या जरूरत थी: विपक्षी सांसद

सरकार को ट्रांसजेंडर समुदाय से संबंधित विधेयक हड़बड़ी में लाने की क्या जरूरत थी: विपक्षी सांसद
Modified Date: March 24, 2026 / 06:47 pm IST
Published Date: March 24, 2026 6:47 pm IST

नयी दिल्ली, 24 मार्च (भाषा) सरकार पर ट्रांसजेंडर समुदाय से संबंधित एक विधेयक हड़बड़ी में संसद में लाने का आरोप लगाते हुए विपक्ष के कुछ सांसदों ने मंगलवार को सवाल किया कि जब दुनिया में युद्ध की स्थिति है और अंतरराष्ट्रीय हालात के प्रभावों पर चर्चा होनी चाहिए, ऐसे में इस संशोधन विधेयक को लाने की ऐसी क्या तत्काल आवश्यकता है।

लोकसभा में ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा में भाग लेते हुए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने इसका विरोध करते हुए कहा कि जब दुनिया में युद्ध के हालात हों और विषम परिस्थिति हों तो सदन में इस मुद्दे पर चर्चा के बजाय इस विधेयक पर चर्चा की क्या जल्दबाजी थी।

उन्होंने विधेयक को वापस लेने और संसद की किसी समिति को अध्ययन के लिए भेजने की मांग करते हुए, तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) की सदस्य डॉ बी शबरी के भाषण का उल्लेख किया और दावा किया कि जन्म के समय ट्रांसजेंडर होने की लैंगिक पहचान को कोई भी शत-प्रतिशत प्रमाणित नहीं कर सकता।

इससे पहले, तेदेपा सांसद शबरी ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा था कि जब बच्चे का जन्म होता है तो डॉक्टर लिंग की पहचान करते हैं और जन्म प्रमाणपत्र में भी इसका उल्लेख होता है। उन्होंने कहा कि ट्रांसजेंडर समुदाय के मामले में मेडिकल प्रक्रिया से पहचान में क्या आपत्ति होनी चाहिए।

सुले ने कहा कि यह विधेयक लाने से पहले ट्रांसजेंडर और किन्नर समुदाय से व्यापक विचार-विमर्श नहीं किया गया है।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को यदि इस समुदाय की इतनी चिंता है और वह इस मामले में इतनी प्रगतिशील है तो ट्रांसजेंडर के लिए आरक्षण लाया जाए।

सुले ने कहा कि उनकी पार्टी ने सबसे पहले अपने संगठन में ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए अलग शाखा बनाई थी।

शिवसेना (उबाठा) के सांसद अरविंद सावंत ने भी इस विधेयक को हड़बड़ी में लाने और पारित कराने की आवश्यकता पर सवाल खड़ा किया।

भाजपा के प्रताप चंद सारंगी ने भी कहा कि ‘‘हमारी सोच वैज्ञानिक होनी चाहिए और लैंगिक पहचान मेडिकल जांच से ही संभव है।’’

उन्होंने कहा कि इस विधेयक का उद्देश्य ट्रांसजेंडर समुदाय को गरिमापूर्ण जीवन प्रदान करना है।

भाषा

वैभव सुभाष

सुभाष


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