महिलाएं उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहीं, लेकिन कई को सामाजिक रूढ़ियों का सामना करना पड़ता है: मुर्मू
महिलाएं उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहीं, लेकिन कई को सामाजिक रूढ़ियों का सामना करना पड़ता है: मुर्मू
नयी दिल्ली, आठ मार्च (भाषा) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को कहा कि महिलाएं विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं, लेकिन कई ऐसी भी हैं जिन्हें सामाजिक रूढ़ियों, आर्थिक असमानताओं और मनोवैज्ञानिक बाधाओं का सामना करना पड़ता है।
मुर्मू ने इस मुद्दे को संवेदनशीलता के साथ सुलझाने के लिए सामूहिक प्रयास का आह्वान किया।
विज्ञान भवन में आयोजित एक राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि सेवा, समर्पण, राष्ट्रवाद, वीरता, धैर्य और प्रतिभा जैसे कई आयामों में महिलाएं पुरुषों के बराबर या उनसे श्रेष्ठ भी हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं जिन विश्वविद्यालयों में जाती हूं, वहां अधिक संख्या में बेटियों को स्वर्ण पदक प्राप्त करते देखती हूं। यह इस बात का प्रमाण है कि अवसर मिलने पर बेटियां उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकती हैं। हालांकि, हमें इस कठोर वास्तविकता को भी स्वीकार करना होगा कि आज भी कई महिलाएं सामाजिक रूढ़ियों, आर्थिक असमानताओं और मनोवैज्ञानिक बाधाओं का सामना करती हैं।’’
राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘समाज में अगर अच्छी चीजें हैं, तो हम ही उन्हें बना रहे हैं। बुरी चीजों को दूर करने और उनका निवारण करने की भी जिम्मेदारी हमारी है। इसलिए, मेरा मानना है कि हमें इन मुद्दों को सुलझाने के लिए और अधिक प्रयास करने चाहिए।’’
राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्र सेविका समिति जैसे संगठन इस दिशा में अहम योगदान दे सकते हैं।
वर्ष 1936 में स्थापित राष्ट्र सेविका समिति, पुरुषों के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के समानांतर एक महिला संगठन के रूप में कार्य करती है।
राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय परंपराओं में महिलाओं को ऐतिहासिक रूप से सम्मान और प्रमुखता दी गई है, और उन्होंने ‘राधा-कृष्ण’ और ‘सीता-राम’ जैसे उदाहरण दिए, जहां सम्मान के प्रतीक के रूप में महिलाओं को पहले स्थान दिया जाता है।
कार्यक्रम के आयोजकों की सराहना करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय विद्वत परिषद भारत की ज्ञान-परंपराओं, शास्त्रीय विचारों और वैज्ञानिक विमर्श को जीवित रखने के लिए ईमानदारी से प्रयास कर रही है।
भाषा
शफीक अविनाश
अविनाश

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