महिलाओं को ‘चरित्रनिष्ठ करियर’ चुनना चाहिए: राष्ट्र सेविका समिति प्रमुख
महिलाओं को 'चरित्रनिष्ठ करियर' चुनना चाहिए: राष्ट्र सेविका समिति प्रमुख
नयी दिल्ली, आठ मार्च (भाषा) राष्ट्र सेविका समिति की प्रमुख वी. शांता कुमारी ने कहा कि महिलाओं को “चरित्रनिष्ठ करियर” अनाना चाहिए, जिसमें कार्यस्थल पर ईमानदारी, नैतिक मूल्य और जिम्मेदारी की भावना शामिल हो।
‘पीटीआई-भाषा’ को दिए एक साक्षात्कार में कुमारी ने नारीवाद पर संगठन के दृष्टिकोण के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि नारीवाद के प्रति भारतीय दृष्टिकोण पुरुषों के साथ प्रतिस्पर्धा करने के बजाय अपने स्वयं के गुणों और चरित्र को विकसित करने पर जोर देता है।
वर्ष 1936 में स्थापित राष्ट्र सेविका समिति, पुरुषों के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के समानांतर एक महिला संगठन के रूप में कार्य करती है।
कुमारी ने कहा कि महिलाएं विभिन्न क्षेत्रों में पुरुषों के साथ-साथ राष्ट्र के विकास में योगदान दे सकती हैं।
उन्होंने कहा, “महिलाएं कोई भी करियर चुन सकती हैं, लेकिन यह चरित्रनिष्ठ करियर होना चाहिये।” उन्होंने यह समझाते हुए कहा कि काम ईमानदारी से और भ्रष्टाचार मुक्त होकर किया जाना चाहिए।
उनके अनुसार, महिलाएं अक्सर कार्यस्थल में परिवार और देखभाल की भावना लाती हैं, जो काम का अधिक सकारात्मक और जिम्मेदार वातावरण बनाने में मदद कर सकती है।
उन्होंने कहा कि भारत में नारीवाद की अवधारणा, पश्चिमी देशों के नारीवाद के विपरीत, पुरुषों के साथ प्रतिस्पर्धा के बजाय आत्म-विकास और सामाजिक जिम्मेदारी में निहित है।
उन्होंने कहा, “पश्चिमी नारीवाद में अक्सर पुरुषों से तुलना करने और यह कहने की प्रवृत्ति होती है कि ‘मुझे पुरुष जैसा होना चाहिए’ या ‘मेरे पास पुरुषों के समान गुण होने चाहिए’। यह भारतीय तरीका नहीं है।”
कुमारी के अनुसार, भारतीय विचार किसी से प्रतिस्पर्धा करने की वकालत नहीं करता, बल्कि महिलाओं को अपनी क्षमताओं और चरित्र को मजबूत करने के लिए प्रोत्साहित करता है।
उन्होंने कहा, “हमें किसी से प्रतिस्पर्धा करने की जरूरत नहीं है। हमारे अपने गुण हैं। हमें उन्हें विकसित करना चाहिए और अपना चरित्र बनाना चाहिए। जब हम ऐसा करेंगे, तभी हम समाज में सम्मान प्राप्त कर सकेंगे।”
भाषा
प्रशांत दिलीप
दिलीप

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