विभाजनकारी शक्तियों के विरुद्ध एकता के लिए काम करें : होसबाले का आह्वान

विभाजनकारी शक्तियों के विरुद्ध एकता के लिए काम करें : होसबाले का आह्वान

विभाजनकारी शक्तियों के विरुद्ध एकता के लिए काम करें : होसबाले का आह्वान
Modified Date: March 14, 2026 / 09:07 pm IST
Published Date: March 14, 2026 9:07 pm IST

नयी दिल्ली, 14 मार्च (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के महासचिव दत्तात्रेय होसबाले ने समाज और देश में एकता का आह्वान करते हुए शनिवार को कहा कि कई विभाजनकारी ताकतें वर्ग और जाति के आधार पर समाज के मानस को तोड़ने की कोशिश कर रही हैं।

होसबाले ने संत रविदास की 650वीं जयंती वर्ष के अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि भारत में ‘‘संतों की गौरवशाली परंपरा’’ में उनका एक विशिष्ट स्थान है।

आरएसएस के दूसरे शीर्ष नेता ने कहा कि संत रविदास ने जन्म आधारित भेदभाव को खारिज करते हुए कर्मों को ही महानता का एकमात्र आधार माना।

उन्होंने कहा कि संत रविदास ने रूढ़ियों और अप्रचलित रीति-रिवाजों से मुक्ति दिलाने, अप्रासंगिक परंपराओं को त्यागने और बदलते समय के अनुरूप सामाजिक परिवर्तनों को स्वीकार करने के लिए सामाजिक विमर्श को आकार देने में ‘‘ऐतिहासिक भूमिका’’ निभाई।

होसबाले ने कहा, ‘‘वर्तमान समय में, जब कई विभाजनकारी ताकतें वर्ग और जाति के आधार पर सामाज के मानस को तोड़ने की कोशिश कर रही हैं, तब हम सभी को पूज्य संत रविदास जी के जीवन संदेश के सार को समझते हुए समाज और राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए काम करने का संकल्प लेना चाहिए।’’

आरएसएस नेता ने भारत के आध्यात्मिक और सामाजिक जीवन को आकार देने में संत परंपरा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि इसने न केवल भक्ति और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई बल्कि विदेशी शासकों के उत्पीड़न के खिलाफ संघर्ष के लिए समाज को जागृत और तैयार भी किया है।

उन्होंने दावा किया कि मुस्लिम आक्रमणकारियों ने रविदास को इस्लाम स्वीकार कराने के लिए कई प्रयास किए, लेकिन वे असफल रहे और उनमें से कई बाद में उनके शिष्य बन गए।

होसबाले ने हरियाणा के समालखा स्थित माधव सृष्टि में कहा, ‘‘संत रविदास जी को इस्लाम में परिवर्तित करने के कई प्रयास किए गए, लेकिन संत रविदास जी की भक्ति और आध्यात्मिक शक्ति को देखकर, जो लोग उनका धर्मांतरण कराना चाहते थे, वे उनके शिष्य बन गए।’’ समालखा में 13 से 15 मार्च तक अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा का आयोजन किया जा रहा है।

आरएसएस नेता ने रेखांकित किया कि संत रविदास का जीवन श्रम की गरिमा और नैतिक आचरण का प्रतीक था।

होसबाले ने कहा, ‘‘उन्होंने अपने जीवन के माध्यम से समाज में श्रम की गरिमा और शुद्ध, सदाचारी और पारदर्शी आचरण को पुनः स्थापित किया।’’

उन्होंने कहा कि संत रविदास की महानता को उनकी साधारण पृष्ठभूमि के बावजूद समाज के सभी वर्गों द्वारा स्वीकार किया गया था और मीराबाई सहित कई प्रमुख हस्तियां उन्हें अपना गुरु मानती थीं।

भाषा धीरज अविनाश

अविनाश


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