MP Biogas Based Village: इस गाँव को नहीं है LPG सिलेंडर का कोई टेंशन.. ईंधन के मामले में है आत्मनिर्भर, आप भी जान लें कैसे
Madhya Pradesh Biogas Based Village: जबलपुर के बंदरकोला गांव में बायोगैस से चलती रसोई, एलपीजी सिलेंडर की चिंता खत्म, जैविक खाद भी मिलती।
MP Biogas Based Village || Image- IBC24News File
- बायोगैस से चलती गांव की रसोई
- एलपीजी सिलेंडर पर निर्भरता खत्म
- जैविक खाद से खेती को फायदा
MP Biogas Based Village: जबलपुर: घरेलू गैस सिलेंडरों की किल्लत के बीच मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले का एक गांव मिसाल बनकर उभरा है। यहां लगभग हर घर में बायोगैस प्लांट लगा है और लोग बिना एलपीजी सिलेंडर के बायोगैस से ही खाना बनाते हैं। इस व्यवस्था से न सिर्फ रसोई चल रही है, बल्कि खेतों के लिए जैविक खाद भी मिल रही है।
70 फ़ीसदी घरों में बायो गैस का उपयोग
देश और प्रदेश के शहरों में भले ही इन दिनों एलपीजी गैस सिलेंडरों को लेकर मारामारी मची हो, लेकिन जबलपुर जिले का बंदरकोला गाँव गैस सिलेंडरों की चिंता से मुक्त है। जबलपुर जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर स्थित इस गांव की आबादी लगभग 1200 है और यहां करीब 400 घर हैं। गांव के अधिकांश घरों में बायोगैस प्लांट लगाए गए हैं, जिनकी मदद से लोग आसानी से खाना बनाते हैं।
गोबर और जैविक कचरे से बनने वाली बायोगैस से यहां चूल्हे जलते हैं और पूरे परिवार का खाना तैयार होता है। इससे गांव के लोगों को गैस सिलेंडर खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती और रसोई का खर्च भी काफी कम हो गया है। बायोगैस का इस्तेमाल इतना आसान है कि महिलाएं भी इसे बेहद सुविधाजनक मानती हैं।
सामूहिक प्रयास से आत्मनिर्भर बनने की कहानी
MP Biogas Based Village: गांव की एक गृहिणी नीता पटेल बताती हैं कि बायोगैस से रोजाना पूरे परिवार का खाना बन जाता है और सिलेंडर की चिंता भी नहीं रहती। बायोगैस प्लांट से निकलने वाला अवशेष भी गांव के किसानों के लिए किसी खजाने से कम नहीं है, क्योंकि यह पूरी तरह जैविक खाद होता है।
इस जैविक खाद से खेतों की उर्वरता बढ़ती है और रासायनिक खाद पर खर्च भी कम हो जाता है। यानी एक ही व्यवस्था से रसोई की गैस भी मिलती है और खेतों के लिए खाद भी। गांव में बायोगैस की यह पहल पंचायत स्तर पर शुरू की गई थी, जिसे लोगों का भरपूर सहयोग मिला। एलपीजी सिलेंडरों की किल्लत और बढ़ती कीमतों के बीच बंदरकोला गांव यह साबित कर रहा है कि अगर सामूहिक पहल हो, तो गांव ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बन सकते हैं।
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