नयी दिल्ली, 21 मार्च (भाषा) ऐसे समय में जब सोशल मीडिया और लघु वीडियो मनोरंजन के पारंपरिक रूपों की जगह ले रहे हैं, अभिनेत्री-गायिका इला अरुण का कहना है कि रंगमंच में युवाओं की भागीदारी एक अच्छा संकेत है, भले ही यह रोजगार के अवसर तलाशने की जरूरत से प्रेरित हो।
इक्कीसवें महिंद्रा एक्सीलेंस इन थिएटर अवार्ड्स (एमईटीए) के निर्णायक मंडल में शामिल इला ने कहा कि गांवों और छोटे शहरों में रंगमंच से जुड़ने वाले लोगों की संख्या बढ़ रही है।
इला ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “यह अच्छी बात है, क्योंकि कहीं न कहीं हमें इस विचार को बनाए रखना होगा कि रंगमंच एक सजीव प्रदर्शन कला का माध्यम है। और इस कला की रक्षा के लिए, हम जितने अधिक युवाओं को हम जोड़ेंगे, उतना ही बेहतर होगा। विभिन्न संस्थाएं जो कर रही हैं, अलग-अलग समूह जो कर रहे हैं, यह सब अच्छा है।”
कमानी सभागार में 19 मार्च से शुरू हुए 21वें मेटा (महिंद्रा एक्सीलेंस इन थिएटर अवार्ड्स) में 13 श्रेणियों में 10 नाटकों का प्रदर्शन किया जा रहा है।
चयनित प्रस्तुतियों में पौराणिक कथाओं, भक्ति, राजनीति और सामाजिक परिवर्तन सहित कई विषयों को शामिल किया गया है।
फिल्म ‘आर्या’ की अभिनेत्री ने कहा कि पहले लोगों को लगता था कि रंगमंच में भविष्य बनाना संभव नहीं है, लेकिन अब यह धारणा बदल रही है।
उन्होंने कहा, “पहले लोग सोचते थे कि रंगमंच करने में कोई नौकरी नहीं, कोई करियर नहीं, कोई भविष्य नहीं। अब उन्हें लगता है कि रंगमंच का रुख करने वालों को काम मिल जाता है, चाहे वह ओटीटी, फिल्मों या कहीं और हो। इसलिए उन्हें लगता है कि किसी न किसी तरह से उन्हें कोई न कोई नौकरी मिल सकती है। या उन्हें लगता है कि वे खुद को अभिव्यक्त कर सकते हैं।”
चयनित नाटकों का प्रदर्शन कमानी सभागार के साथ-साथ श्री राम प्रदर्शन कला केंद्र में किया जाएगा।
थिएटर महोत्सव और पुरस्कार समारोह का समापन 25 मार्च को कमानी सभागार में मेटा अवार्ड्स नाइट के साथ होगा।
भाषा तान्या पवनेश
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