भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद विवाद : मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय छह अप्रैल से नियमित सुनवाई करेगा
भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद विवाद : मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय छह अप्रैल से नियमित सुनवाई करेगा
इंदौर, दो अप्रैल (भाषा) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह धार के भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद परिसर के धार्मिक स्वरूप को लेकर जारी विवाद से जुड़े मामलों में छह अप्रैल से नियमित सुनवाई करेगी और सभी संबद्ध पक्षों की दलीलें सिलसिलेवार तौर पर सुनेगी।
भोजशाला को हिंदू समुदाय वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष संभवतः 11वीं सदी के इस परिसर को कमाल मौला मस्जिद बताता है। यह विवादित परिसर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित है।
उच्च न्यायालय इस परिसर के धार्मिक स्वरूप के विवाद को लेकर दायर चार याचिकाओं और एक रिट अपील पर एक साथ सुनवाई कर रहा है।
न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी ने सभी पक्षों को सुनने और शीर्ष अदालत के बुधवार के एक आदेश के अवलोकन के बाद मौखिक टिप्पणी की, “हम सभी मामलों में सोमवार (छह अप्रैल) से नियमित सुनवाई करेंगे। हम सभी पक्षों और हस्तक्षेपकर्ताओं की दलीलें सिलसिलेवार तरीके से सुनेंगे।”
मामले के पक्षकारों में शामिल धार की ‘मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी’ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने पैरवी की। उन्होंने कहा कि विवादित परिसर में एएसआई के वैज्ञानिक सर्वेक्षण की वीडियोग्राफी और रंगीन तस्वीरें उन्हें अब तक न तो प्रदान की गई हैं, न ही दिखाई गई हैं।
खुर्शीद ने उच्च न्यायालय से अनुरोध किया कि अदालत के अवलोकन के बाद यह वीडियोग्राफी और रंगीन तस्वीरें उनसे साझा की जानी चाहिए, क्योंकि मामले में उनकी आगामी आपत्तियां इस सामग्री की प्रकृति पर निर्भर कर सकती है। उन्होंने इस सिलसिले में शीर्ष अदालत के बुधवार के आदेश का हवाला भी दिया।
शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय की कार्यवाही में फिलहाल हस्तक्षेप से इनकार करते हुए ‘मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी’ की अपील का बुधवार को निपटारा कर दिया था।
शीर्ष अदालत ने विश्वास जताया था कि उच्च न्यायालय वीडियोग्राफी के अवलोकन के बाद अपीलकर्ता और अन्य पक्षों की आपत्तियों पर प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुसार विचार करते हुए उचित फैसला लेगा।
एएसआई ने उच्च न्यायालय के आदेश पर दो साल पहले विवादित परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण करके अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपी थी।
एएसआई की 2,000 से ज्यादा पन्नों की रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि इस परिसर में धार के परमार राजाओं के शासनकाल की एक विशाल संरचना मस्जिद के मुकाबले पहले से मौजूद थी और वहां वर्तमान में मौजूद विवादित ढांचा मंदिरों के हिस्सों का फिर से इस्तेमाल करते हुए बनाया गया था।
समूचे विवादित परिसर का धार्मिक स्वरूप तय करने की अपील के साथ उच्च न्यायालय का रुख करने वाले हिंदू पक्ष का दावा है कि एएसआई को वैज्ञानिक सर्वेक्षण में मिले सिक्के, मूर्तियां और शिलालेख गवाही देते हैं कि यह परिसर मूलत: एक मंदिर था।
दूसरी ओर, मुस्लिम पक्ष ने एएसआई के सर्वेक्षण पर सवाल उठाते हुए इस दावे को खारिज किया है। मुस्लिम पक्ष का आरोप है कि एएसआई ने उसकी पुरानी आपत्तियों को दरकिनार करते हुए विवादित परिसर में “पीछे के रास्ते से रखी गई चीजों” को भी सर्वेक्षण में शामिल किया।
भाषा
हर्ष पारुल
पारुल

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