इंदौर पेयजल त्रासदी : मप्र उच्च न्यायालय के सामने राज्य सरकार ने इसे ‘लोक स्वास्थ्य आपातकाल’ बताया

इंदौर पेयजल त्रासदी : मप्र उच्च न्यायालय के सामने राज्य सरकार ने इसे ‘लोक स्वास्थ्य आपातकाल’ बताया

इंदौर पेयजल त्रासदी : मप्र उच्च न्यायालय के सामने राज्य सरकार ने इसे ‘लोक स्वास्थ्य आपातकाल’ बताया
Modified Date: January 2, 2026 / 08:31 pm IST
Published Date: January 2, 2026 8:31 pm IST

इंदौर, दो जनवरी (भाषा) मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में शुक्रवार को राज्य सरकार ने कहा कि कि इंदौर के भागीरथपुरा स्वास्थ्य संकट को ‘लोक स्वास्थ्य आपातकाल’ के रूप में लिया गया है तथा आपातकालीन उपायों और निरंतर निगरानी के बाद स्थिति सफलतापूर्वक काबू में आ गयी है।

उच्च न्यायालय में पेश राज्य सरकार की स्थिति रिपोर्ट में कहा गया कि देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में डायरिया के प्रकोप को ‘लोक स्वास्थ्य आपातकाल’ के रूप में लेते हुए प्रभावी कदम उठाए गए हैं।

राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ के निर्देश पर यह रिपोर्ट पेश की। अदालत पेयजल त्रासदी को लेकर इंदौर उच्च न्यायालय अभिभाषक (वकील) संघ के अध्यक्ष रितेश ईनाणी की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है। याचिका पर छह जनवरी को अगली सुनवाई होगी।

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स्थिति रिपोर्ट में बताया गया है कि भागीरथपुरा इलाके में 29 दिसंबर से डायरिया के मामले सामने आने शुरू हुए और जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल इनका संज्ञान लिया।

रिपोर्ट के मुताबिक शुक्रवार तक कुल 294 मरीज स्थानीय अस्पतालों में भर्ती हुए जिनमें से 93 लोगों को छुट्टी दे दी गई है यानी 201 मरीज अब भी भर्ती हैं जिनमें से 32 व्यक्ति गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में हैं।

रिपोर्ट में बताया गया कि भागीरथपुरा क्षेत्र में 28 और 31 दिसंबर के बीच उर्मिला (60), तारा (65), नंदलाल (70) एवं हीरालाल (65) की डायरिया से मौत हुई है तथा अन्य मृतकों की संख्या का अभी पता नहीं चल सका है।

हालांकि इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने शुक्रवार को कहा कि उन्हें दूषित पानी के कारण फैले डायरिया के प्रकोप से 10 मौतों की जानकारी मिली है।

उधर, स्थानीय नागरिकों ने इस प्रकोप के कारण छह माह के बच्चे समेत 15 लोगों के दम तोड़ने का दावा किया है। वैसे इस दावे की स्वास्थ्य विभाग ने पुष्टि नहीं की है।

प्रशासन के एक अधिकारी की ओर से पेश स्थिति रिपोर्ट में याचिका में लगाए गए इस आरोप को खारिज किया गया है कि पीड़ितों को सहायता नहीं दी गई।

रिपोर्ट में भागीरथपुरा में डायरिया के प्रकोप से निपटने के अलग-अलग उपायों का जिक्र करते हुए कहा गया है कि इस स्थिति को चिकित्सा क्षेत्र की किसी सामान्य समस्या के रूप में नहीं, बल्कि ‘लोक स्वास्थ्य आपातकाल’ के तौर पर लिया गया है।

रिपोर्ट में बताया गया,‘‘भागीरथपुरा में हालात फिलहाल नियंत्रण में हैं जिनकी निरंतर निगरानी की जा रही है और (डायरिया के) नये मामलों में कोई असामान्य वृद्धि दर्ज नहीं की गई है।’’

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यदि किसी भी प्रकार की गंभीर आपात स्थिति उत्पन्न होती है, तो चिकित्सा और प्रशासन का अमला इससे निपटने के लिए तैयार है।

रिपोर्ट में कहा गया कि बीमारी के कारण एवं स्रोत के संबंध में जांच और जल गुणवत्ता का आकलन वैधानिक प्रक्रिया के अनुसार जारी है तथा अंतिम रिपोर्ट प्राप्त होने पर कानून के अनुसार उचित कार्रवाई की जाएगी।

रिपोर्ट में कहा गया,‘‘हालात को प्रभावी ढंग से संभालने के लिए सरकारी और निजी क्षेत्र की मौजूदा चिकित्सा अवसंरचना के अलावा, वरिष्ठ तथा कनिष्ठ चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ के साथ अतिरिक्त चिकित्सा कर्मियों को तैनात किया गया है।’’

भाषा हर्ष

राजकुमार

राजकुमार


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