मप्र : दृष्टिबाधित उम्मीदवार ने पहले ही प्रयास में सिविल सेवा परीक्षा में हासिल की कामयाबी
मप्र : दृष्टिबाधित उम्मीदवार ने पहले ही प्रयास में सिविल सेवा परीक्षा में हासिल की कामयाबी
इंदौर (मध्यप्रदेश), छह मार्च (भाषा) इंदौर के अक्षत बल्दवा (25) बचपन से देख नहीं सकते, लेकिन अपने जीवन को लेकर उनके लक्ष्य एकदम स्पष्ट रहे हैं। शारीरिक बाधाओं को पछाड़ते हुए उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की आयोजित सिविल सेवा परीक्षा-2025 में कामयाबी का लक्ष्य पहले ही प्रयास में हासिल कर लिया है।
उन्हें इस परीक्षा की प्रावीण्य सूची में 173वां स्थान मिला है। बल्दवा ने बेंगलुरु की नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी से बीए-एलएलबी (ऑनर्स) की उपाधि हासिल की है। वह इन दिनों कर्नाटक की राजधानी में ही रह रहे हैं।
बल्दवा ने शुक्रवार को फोन पर ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘मैं जब 11वीं कक्षा में पढ़ रहा था, तब ही तय कर लिया था कि एक दिन मुझे सिविल सेवा परीक्षा में सफल होना है। पहले ही प्रयास में इस परीक्षा में मिली कामयाबी ने मुझे सुखद आश्चर्य से भर दिया है और मैं इस पल को महसूस कर रहा हूं।’’
बल्दवा के मुताबिक डेढ़ माह की उम्र में एक गंभीर बीमारी के कारण उनकी आंखों की रोशनी चली गई थी और वह 100 प्रतिशत दृष्टिबाधित हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘जाहिर है कि मेरे सामने हमेशा से चुनौतियां रही हैं, लेकिन मैं इन चुनौतियों के बारे में नहीं, बल्कि इनसे निपटने के तरीकों के बारे में सोचता हूं। मुझे भीड़ का हिस्सा नहीं बनना है। मुझे बड़े लक्ष्य हासिल करने हैं।’’
बल्दवा ने कहा कि सिविल सेवा परीक्षा में उनकी कामयाबी में उनकी मां मीना का सबसे बड़ा योगदान है। उन्होंने बताया,‘‘बेंगलुरु में मेरी पढ़ाई के दौरान मां हमारे परिवार को छोड़कर मेरे साथ रहीं।’’
इस बीच, बेंगलुरु से करीब 1,450 किलोमीटर दूर इंदौर में बल्दवा के घर में जश्न का माहौल है। उनके पिता संजय बल्दवा ने कहा,‘‘सिविल सेवा परीक्षा में मेरे बेटे की सफलता ने हमें गर्व से भर दिया है। वह पढ़ाई को लेकर बचपन से जुनूनी रहा है।’’
उन्होंने बताया कि संगीत के शौक के कारण उनके बेटे ने तबला और हारमोनियम बजाना भी सीखा है।
भाषा
हर्ष रवि कांत

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