Jitu Patwari News: चुनावी घोषणाओं पर BJP का यू-टर्न! बहनो को 1500, लेकिन जीजाओं को थमाया 5000 का बिजली बिल! PCC चीफ ने खोली इन वादों की पोल, देखें
Jitu Patwari News: चुनावी घोषणाओं पर BJP का यू-टर्न! बहनो को 1500, लेकिन जीजाओं को थमाया 5000 का बिजली बिल! PCC चीफ ने खोली इन वादों की पोल, देखें
Jitu Patwari News/Image Source: IBC24
- जीतू पटवारी ने खोला भाजपा का राज
- गेहूं और धान में BJP का 'यू-टर्न'
- छोटे किसान और मजदूर हुए सबसे ज्यादा प्रभावित
रायसेन: Jitu Patwari News: बूथ चलो–गांव चलो अभियान के दौरान मध्यप्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार ने लाड़ली बहना योजना के तहत महिलाओं को 1,500 रुपए तो दिए लेकिन उल्टी चाल चलते हुए घरों में बिजली के बिल बढ़ाकर 5,000 रुपए थमा दिए। जीतू पटवारी ने कहा है कि भाजपा सरकार ने चुनावी लाभ के लिए विभिन्न प्रलोभनों का सहारा लिया। उन्होंने दावा किया कि लाड़ली बहना योजना, धान और गेहूं की खरीद और किसानों को दिए गए वादों के माध्यम से वोट हासिल किए गए।
लाड़ली बहना को बहलाया, किसान का पैसा छीना (MP political news)
पटवारी ने कहा कि लाड़ली बहना योजना के तहत महिलाओं को 1,500 रुपये दिए गए, लेकिन पीछे से उनके घर वालों को बिजली के बिल के रूप में 3,000 से 5,000 रुपये का भार दिया गया। इसके अलावा, किसानों को धान और गेहूं के लिए उच्च दर का आश्वासन दिया गया था। लेकिन वास्तविकता में धान और गेहूं के दाम घटाए गए, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान हुआ।
भाजपा सरकार ने लाड़ली बहना को 1500 रुपये तो दिए, लेकिन यू टर्न लेकर जीजाओं को 5 हज़ार रुपये के बिजली के बिल थमा दिए।
📍: बूथ चलो गाँव चलो अभियान, रायसेन। pic.twitter.com/HNjZcMsZwB
— Jitendra (Jitu) Patwari (@jitupatwari) January 5, 2026
पटवारी का BJP पर हमला (jitu patwari latest news)
Jitu Patwari News: उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस का संगठन मजबूत होता और हम लोगों को सही तरीके से समझाते, तो ये प्रलोभन काम नहीं करते और कांग्रेस फिर भी जीत जाती। लाड़ली बहना और किसानों को सही जानकारी देने से लोगों को अपने हक का लाभ मिलता। पटवारी ने उदाहरण देते हुए बताया कि यदि धान का सही मूल्य 3,100 दिया जाता और गेहूं की खरीद उचित दर पर होती, तो केवल एक हेक्टेयर जमीन वाले किसान को भी लगभग 1 लाख का लाभ होता। इसके अलावा मजदूरों को भी उनकी मजदूरी का सही भुगतान किया जा सकता था।

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