गर्भपात के अनुरोध वाली एक याचिका खारिज; अदालत ने कहा- यह भ्रूण हत्या के बराबर होगा
गर्भपात के अनुरोध वाली एक याचिका खारिज; अदालत ने कहा- यह भ्रूण हत्या के बराबर होगा
मुंबई, 30 जनवरी (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय ने 18-वर्षीय एक लड़की की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने 28 सप्ताह के अपने गर्भ को चिकित्सकीय रूप से समाप्त करने की अनुमति देने का अनुरोध किया था।
न्यायमूर्ति रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति अभय मंत्री की खंडपीठ ने इस हफ्ते की शुरुआत में पारित आदेश में कहा कि ऐसा कदम भ्रूण हत्या के बराबर होगा, क्योंकि ‘‘भ्रूण स्वस्थ और जीवित रहने योग्य है।’’
खंडपीठ ने लड़की को प्रसव तक व्यापक चिकित्सकीय और मनोवैज्ञानिक सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया।
उसने कहा, ‘‘बच्चे के जन्म के बाद, और जब वह गोद लेने के लिए किसी पंजीकृत अनाथालय में सौंपे जाने की स्थिति में हो जाता है, तो बाल कल्याण समिति लड़की को इस संबंध में भी सहायता प्रदान करेगी।’’
लड़की 17 साल की उम्र में अपने एक पुरुष मित्र के साथ संबंध बनाने के बाद गर्भवती हो गई थी। उसकी मां ने उसका गर्भपात कराने की अनुमति हासिल करने के लिए उच्च न्यायालय का रुख किया था।
मां ने अपनी याचिका में दावा किया था कि उसकी बेटी के पुरुष मित्र ने शादी का झांसा देकर उसे यौन संबंध बनाने के लिए मजबूर किया। लड़की के गर्भवती होने की बात सामने आने के बाद दो जनवरी को मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
भाषा पारुल सुरेश
सुरेश

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