अजित पवार की अस्थियों को बारामती के पास दो नदियों के संगम पर विसर्जित किया गया

अजित पवार की अस्थियों को बारामती के पास दो नदियों के संगम पर विसर्जित किया गया

अजित पवार की अस्थियों को बारामती के पास दो नदियों के संगम पर विसर्जित किया गया
Modified Date: January 30, 2026 / 07:44 pm IST
Published Date: January 30, 2026 7:44 pm IST

पुणे, 30 जनवरी (भाषा) महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का दाह संस्कार किए जाने के एक दिन बाद शुक्रवार को उनके गृहनगर बारामती में नीरा और करहा नदियों के संगम पर उनकी अस्थियां विसर्जित की गईं।

इससे पहले दिन में अजित पवार के दोनों बेटों ने अंतिम संस्कार स्थल से उनकी अस्थियां एकत्र कीं।

बुधवार को पुणे जिले के बारामती में एक विमान दुर्घटना में अजित पवार और चार अन्य लोगों की मृत्यु हो गई थी। बृहस्पतिवार को बारामती के विद्या प्रतिष्ठान कॉलेज मैदान में प्रमुख नेताओं और हजारों लोगों की उपस्थिति में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अजित पवार का अंतिम संस्कार किया गया था।

शुक्रवार को, अजित पवार के बेटों पार्थ और जय ने अस्थियां एकत्र कीं। इसके बाद एक छोटी नाव में बैठे पवार परिवार के सदस्य बारामती के पास नीरा-करहा संगम की ओर बढ़े, जहां अजित पवार के बड़े बेटे पार्थ ने अस्थि विसर्जन किया।

अस्थि विसर्जन के दौरान, राकांपा (एसपी) अध्यक्ष शरद पवार ने पास के वागज गांव के निवासियों से मुलाकात की, जिन्होंने उन्हें नीरा नदी का पानी दिखाया और नदी के किनारे स्थित चीनी मिलों से निकलने वाले अपशिष्टों से होने वाले प्रदूषण की ओर ध्यान आकर्षित किया।

हिंदू धर्म में, पारंपरिक रूप से दाह संस्कार के अगले दिन अस्थियां एकत्र की जाती हैं, और बाद में नदी में विसर्जित कर दी जाती हैं।

राकांपा (एसपी) विधायक और अजित पवार के भतीजे रोहित पवार ने उनके निधन पर एक भावनात्मक पोस्ट लिखा।

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि जिस भूमि पर अजित दादा ने विकास का बगीचा लगाया था, वही भूमि एक दिन उनकी अस्थियों के संग्रह का गवाह बनेगी। नियति की क्रूरता के आगे किसी की नहीं चलती।’’

पोस्ट में आगे कहा गया, ‘‘आज अस्थियां इकट्ठा करते समय ऐसा लगा जैसे आप अचानक ‘फीनिक्स’ (अपनी राख से जीवंत होने वाला पक्षी) की तरह अस्थियों में से उठकर खड़े हो गए हैं, अपने उसी ऊंचे कद के साथ…नेतृत्व के लिए तैयार और अपनी जानी-पहचानी आवाज़ में हमसे कह रहे हैं – ‘अरे बेवकूफों, तुम क्यों आंसू बहा रहे हो? मैं तो बस तुम्हारी टांग खिंचाई कर रहा था। मैं तो केवल यह देखने के लिए नाटक कर रहा था कि तुम किसी मुश्किल का सामना करने के लिए कितने तैयार हो। अब उठो, काम पर वापस लगो। हमें महाराष्ट्र के लिए, यहां के आम लोगों के लिए बहुत कुछ करना है। चलो, देर मत करो…।’’

भाषा

शफीक दिलीप

दिलीप


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