बाल विवाह पर रोक: निमंत्रण पत्रों पर जन्म तिथि छापने के नियम पर विचार कर रही महाराष्ट्र सरकार

बाल विवाह पर रोक: निमंत्रण पत्रों पर जन्म तिथि छापने के नियम पर विचार कर रही महाराष्ट्र सरकार

बाल विवाह पर रोक: निमंत्रण पत्रों पर जन्म तिथि छापने के नियम पर विचार कर रही महाराष्ट्र सरकार
Modified Date: June 24, 2026 / 03:19 pm IST
Published Date: June 24, 2026 3:19 pm IST

मुंबई, 24 जून (भाषा) महाराष्ट्र में बाल विवाह पर रोक लगाने के लिए राज्य सरकार विवाह निमंत्रण पत्रों पर दूल्हा और दुल्हन की जन्मतिथि छापने के नियम पर विचार कर रही है। महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने बुधवार को यह जानकारी दी।

तटकरे ने विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सदस्य अतुल भाटखालकर द्वारा पूछे गए प्रश्न के उत्तर में कहा कि राज्य का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में बाल विवाह की घटनाओं को 10 प्रतिशत से नीचे लाना है।

मंत्री ने बताया कि महाराष्ट्र ने राजस्थान सरकार को पत्र लिखकर विवाह निमंत्रण पत्रों पर वर-वधू दोनों की जन्मतिथि अंकित करने की उसकी व्यवस्था का अध्ययन किया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण विकास विभाग तथा विधि एवं न्याय विभाग के साथ परामर्श करके इस व्यवस्था को लागू करने की व्यवहार्यता पर विचार करेगी।

उन्होंने कहा कि राज्य में बाल विवाह दर 2019-21 के सर्वे के 21.9 प्रतिशत से घटकर 2023-24 में 19.6 प्रतिशत हो गई है, जबकि नवीनतम सर्वेक्षण में राष्ट्रीय औसत लगभग 20.1 प्रतिशत है।

मंत्री ने बताया कि 2025-26 में अब तक 1,434 बाल विवाह रोके गए हैं और 136 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024-25 में 1,495 बाल विवाह रोके गए, जबकि 2023-24 में 1,253 मामले रोके गए और 108 प्राथमिकी दर्ज हुईं।

मंत्री ने कहा, “बाल विवाह रोकने के मामलों में वृद्धि को बाल विवाह बढ़ने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह सरकारी तंत्र की बेहतर पहचान, रिपोर्टिंग और हस्तक्षेप को दर्शाता है।’’

उन्होंने बताया कि बाल विवाह में शामिल परिवार के सदस्यों के अलावा उन लोगों पर भी कार्रवाई की जा रही है जो इस तरह के आयोजनों को जानबूझकर बढ़ावा देते हैं, जिनमें पुजारी, संगीतकार और अन्य शामिल हैं।

मंत्री ने सदन को बताया कि जिला स्तर पर कलेक्टरों की अध्यक्षता में कार्यबल, ग्राम सुरक्षा समितियां तथा तालुका और ग्राम पंचायत स्तर की समितियां सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि छह जिलों को विशेष तौर पर ध्यान दिये जाने के लिए चिन्हित किया गया है, जहां प्रवासन एक प्रमुख कारण बनकर उभरा है, विशेषकर बीड और मराठवाड़ा क्षेत्र के अन्य जिलों में, जहां परिवार गन्ना कटाई के काम के लिए पलायन करते हैं।

उन्होंने कहा कि समस्या से निपटने के लिए प्रवासी श्रमिकों के बीच लक्षित जागरूकता अभियान चलाने और बच्चों को सुरक्षित वातावरण में रखने के लिए बाल देखभाल केंद्रों एवं आवासीय सुविधाओं के विस्तार की योजना है।

भाषा अमित प्रशांत

प्रशांत


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