बांग्लादेशी को फर्जी भारतीय पहचान से कुवैत में काम करने के आरोप में सात महीने की जेल
बांग्लादेशी को फर्जी भारतीय पहचान से कुवैत में काम करने के आरोप में सात महीने की जेल
मुंबई, 22 मई (भाषा) मुंबई की एक अदालत ने 46 वर्षीय एक बांग्लादेशी व्यक्ति को 2005 में अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने और जाली दस्तावेजों का उपयोग करके एक दशक तक कुवैत में काम करने के लिए सात महीने जेल की सजा सुनाई है। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में नरमी बरतना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एस्प्लेनेड कोर्ट) के. एस. जनवार ने बांग्लादेशी नागरिक को आव्रजन और विदेशी अधिनियम के साथ-साथ भारतीय न्याय संहिता के तहत धोखाधड़ी, सार्वजनिक रजिस्टर/पहचान प्रमाणों की जालसाजी और जाली दस्तावेज रखने का दोषी ठहराया।
अदालत ने 21 मई को अपने फैसले में टिप्पणी की कि ‘किसी अन्य देश का नागरिक (भारत में विदेशी) भारतीय नागरिक के समान अधिकारों और सुविधाओं का दावा नहीं कर सकता’।
अदालत ने कहा, ‘यदि इस तरह की नरमी बरती जाती है तो यह राष्ट्रीय सुरक्षा और यहां तक कि भारतीय नागरिकों के वैध अधिकारों के लिए भी खतरनाक साबित हो सकती है, क्योंकि अनधिकृत प्रवेश से भारत की अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ सकता है।’
हालांकि आरोपी को 14 अक्टूबर 2025 को गिरफ्तारी के बाद से लगातार हिरासत में रखा गया है, इसलिए उसकी सजा पूरी मानी गई है। अदालत ने अभियोजन पक्ष को आरोपी को बांग्लादेश प्रत्यर्पित करने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया।
भाषा
शुभम नरेश
नरेश

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