बंबई उच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र के पूर्व डीजीपी संजय पांडे के विरूद्ध प्राथमिकी खारिज की

बंबई उच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र के पूर्व डीजीपी संजय पांडे के विरूद्ध प्राथमिकी खारिज की

बंबई उच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र के पूर्व डीजीपी संजय पांडे के विरूद्ध प्राथमिकी खारिज की
Modified Date: May 20, 2026 / 09:30 pm IST
Published Date: May 20, 2026 9:30 pm IST

मुंबई, 20 मई (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय ने बुधवार को ठाणे में महाराष्ट्र के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) संजय पांडे और अन्य व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज जबरन वसूली की शिकायत संबंधी प्राथमिकी को रद्द कर दिया।

मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति सुमन श्याम की पीठ द्वारा दिया गया विस्तृत आदेश अभी उपलब्ध नहीं है।

बिल्डर-सह-व्यापारी संजय पुनामिया ने 26 अगस्त, 2024 को शिकायत दर्ज करायी थी जिसके आधार पर पर प्रथम सूचना रिपोर्ट/प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

पुनामिया ने आरोप लगाया था कि पांडे ने 2021 में डीजीपी के पद का दुरुपयोग करके उससे पैसे वसूले। उसने दावा किया था कि पांडे ने उसे झूठे बयान देने के लिए मजबूर किया तथा धमकी दी कि यदि उसने ऐसा नहीं किया कि उसे फंसाने के लिए उसके विरूद्ध पुराने मामले अवैध रूप से फिर खोले जायेंगे तथा झूठी प्राथमिकी दर्ज की जाएंगी।

व्यापारी ने दावा किया था कि जब वह अस्पताल में भर्ती था, तो अधिकारियों ने संजय पांडे के निर्देशों का हवाला देते हुए उस पर दबाव डाला कि वह देवेंद्र फडणवीस (तत्कालीन उपमुख्यमंत्री) और एकनाथ शिंदे (तत्कालीन मुख्यमंत्री) को कथित शहरी भूमि सीमा (यूएलसी) घोटाले में झूठा फंसाए, ताकि उसके खिलाफ लगे आरोप वापस ले लिए जाएं।

पुनामिया ने आरोप लगाया था कि उसके छोटे भाई को धमकाया गया और आगे झूठे मुकदमों से बचने के लिए उससे मांगे गए एक करोड़ रुपये में से 35 लाख रुपये जबरन लिये गये।

पांडे के अलावा, वकील शेखर जगताप और अग्रवाल परिवार के सदस्यों को भी प्राथमिकी में नामजद किया गया था।

पांडे के वकील राहुल खामेरकर ने इन सभी आरोपों का जोरदार खंडन किया।

प्राथमिकी रद्द करने की मांग करते हुए अपने आवेदन में पांडे ने तर्क दिया कि यह मामला उनकी सेवानिवृत्ति के बाद शुरू की गई ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ का परिणाम है।

पांडे के वकील द्वारा दिये गये अन्य प्रमुख तर्कों में प्राथमिकी दर्ज करने में तीन साल की अस्पष्ट देरी भी शामिल है।

उन्होंने बताया कि कथित घटनाए 2021 में घटी थीं, लेकिन शिकायत 2024 में ही दर्ज की गई थी।

भाषा

राजकुमार माधव

माधव


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