अदालत ने छात्रा की आत्महत्या मामले में प्रोफेसर को अग्रिम जमानत दी
अदालत ने छात्रा की आत्महत्या मामले में प्रोफेसर को अग्रिम जमानत दी
मुंबई, आठ मई (भाषा) अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत एक विशेष अदालत ने ‘मास्टर ऑफ डेंटल सर्जरी’ (एमडीएस) की छात्रा (24) की आत्महत्या से संबंधित मामले में 60 वर्षीय मेडिकल प्रोफेसर को अग्रिम जमानत दे दी है।
अदालत ने कहा कि ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह पता चले कि उसने पीड़िता को उसकी जाति के आधार पर प्रताड़ित किया या उसे आत्महत्या करने के लिए मजबूर किया।
छात्रा स्तुति सोनावाने नौ मार्च को मुंबई के एंटॉप हिल इलाके में अपने घर में फंदे से लटकी हुई मिली थी। उसके प्रेमी फजल मोहम्मद खान (31), जो बीमा एजेंट हैं, को मध्य मुंबई के लोअर परेल से गिरफ्तार किया गया था।
शुरुआती जांच में खान पर ध्यान केंद्रित किया गया था, लेकिन बाद में पुलिस ने व्हाट्सएप संदेशों के आधार पर उसके शिक्षक डॉ. कुलविंदर सिंह बंगा को भी फंसाने की कोशिश की।
बंगा के वकीलों एस पसबोला और अमित घाग ने कहा कि रिपोर्ट में ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह साबित हो कि पीड़िता के साथ उसकी जाति के आधार पर दुर्व्यवहार किया गया था।
न्यायाधीश जी.जी. भंसाली ने बृहस्पतिवार को पारित एक आदेश में कहा कि खान के खिलाफ कई आरोप लगाए गए हैं, लेकिन पांच से छह पन्नों के ‘सुसाइड नोट’ में बंगा के बारे में कुछ भी उल्लेख नहीं है।
आदेश में प्रोफेसर और उनकी छात्रा के बीच अच्छे संबंधों को दर्शाने वाले कई कारकों पर प्रकाश डाला गया।
अदालत ने स्वीकार किया कि अपने अंतिम क्षणों में लिखे पत्र में, स्तुति ने अपने माता-पिता, अपनी बहन और डॉ. बंगा से ‘माफी’ मांगी थी जिससे पता चलता है कि छात्रा ने उन्हें अपने परिवार के बराबर दर्जा दिया था।
इसके अलावा, अदालत ने गौर किया कि पीड़िता द्वारा बंगा के जन्मदिन पर लिखे गए पत्र में उन्हें ‘मार्गदर्शक से कहीं अधिक और भगवान’ के रूप में वर्णित किया गया था, जिन्होंने उसके जीवन को ‘बदल दिया’ था। अदालत ने इस बात पर भी गौर किया कि बंगा ने पीड़िता की फीस के लिए दो लाख रुपये जमा किए थे और उसके माता-पिता को इसकी जानकारी थी।
अदालत ने बंगा की अग्रिम जमानत मंजूर करते हुए कहा कि ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे यह पता चले कि आवेदक के कृत्य या व्यवहार ने स्तुति सोनावाने को आत्महत्या के लिए मजबूर किया।
भाषा तान्या अविनाश
अविनाश

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