महाराष्ट्र में 23 हजार से अधिक आर्द्रभूमि क्षेत्रों को कानूनी संरक्षण देने की मांग तेज
महाराष्ट्र में 23 हजार से अधिक आर्द्रभूमि क्षेत्रों को कानूनी संरक्षण देने की मांग तेज
ठाणे, 22 मई (भाषा) अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के अवसर पर शुक्रवार को पर्यावरणविदों ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से राज्य के 23 हजार से अधिक आर्द्रभूमि (वेटलैंड) क्षेत्रों को कानूनी संरक्षण देने की प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग की।
पर्यावरणविदों ने चेतावनी दी कि और देरी होने पर जैव विविधता के नुकसान एवं जलवायु संबंधी जोखिम बढ़ेंगे।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सतत तटीय प्रबंधन केंद्र (एनसीएससीएम) ने महाराष्ट्र में चिह्नित 23,415 आर्द्रभूमियों में से 23,404 का दस्तावेजीकरण और जमीनी सत्यापन पूरा कर लिया है। केवल पुणे जिले की 11 आर्द्रभूमियों का सत्यापन बाकी है।
पर्यावरणविदों ने कहा कि सत्यापित आंकड़े अब अंतिम कानूनी अधिसूचना के लिए जिला प्रशासन और राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण को भेजे जाएंगे ताकि आर्द्रभूमि नियमों के तहत उन्हें संरक्षण प्रदान किया जा सके।
पर्यावरण संगठन ‘वनशक्ति’ की याचिका पर उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के बाद एनसीएससीएम ने यह सत्यापन कार्य तेज किया है। याचिका में मौसम संबंधी अप्रत्याशित घटनाओं के प्रभाव को कम करने के लिए समयबद्ध सीमांकन का अनुरोध किया गया था।
संगठन ‘सागरशक्ति’ के निदेशक नंदकुमार पवार ने कहा कि तटीय क्षेत्रों में आर्द्रभूमियों के विनाश से पहले ही गंभीर बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो चुकी है, जिसके कारण राज्य को नुकसान की भरपाई पर करदाताओं के करोड़ों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
‘नेटकनेक्ट फाउंडेशन’ के निदेशक बी एन कुमार ने दावा किया कि राष्ट्रीय आर्द्रभूमि एटलस की शुरुआत के बाद से पिछले 16 वर्षों से संरक्षण की प्रक्रिया लंबित है, जिसके चलते उरण और मुंबई महानगर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर मलबा डाले जाने और अतिक्रमण की घटनाएं हुई हैं।
उन्होंने कहा कि ये पारिस्थितिकी तंत्र महत्वपूर्ण कार्बन सिंक और प्राकृतिक बाढ़ अवरोधक के रूप में कार्य करते हैं।
भाषा रवि कांत नेत्रपाल
नेत्रपाल

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