बांग्लादेश में हिंदुओं ने एकजुट होकर प्रतिरोध करने का विकल्प चुना: मोहन भागवत
बांग्लादेश में हिंदुओं ने एकजुट होकर प्रतिरोध करने का विकल्प चुना: मोहन भागवत
(तस्वीरों के साथ)
मुंबई, आठ फरवरी (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं ने भागने के बजाय एकजुट होकर प्रतिरोध करने का विकल्प चुना है। उन्होंने बांग्लादेशी हिंदुओं को संघ के समर्थन का भरोसा दिलाया।
भागवत ने आरएसएस के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में अपनी सेवानिवृत्ति, भाषा, जाति, जनसंख्या असंतुलन, समान नागरिक संहिता (यूसीसी), घुसपैठ, धर्म और राष्ट्रीय एकता सहित कई मुद्दों पर बात की।
स्थानीय भाषाओं की प्रधानता पर जोर देते हुए भागवत ने कहा कि आरएसएस के कामकाज में अंग्रेजी कभी भी संचार का माध्यम नहीं होगी, क्योंकि यह भारतीय भाषा नहीं है।
आरएसएस के संबंध में समुदाय आधारित प्रतिनिधित्व को लेकर बनी धारणाओं को दूर करते हुए भागवत ने कहा कि संघ प्रमुख को हिंदू होना चाहिए, चाहे उसकी जाति कोई भी हो।
बांग्लादेश में हिंदू आबादी का जिक्र करते हुए भागवत ने कहा कि एकजुटता उन्हें स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित करने में सक्षम बनाएगी।
उन्होंने कहा, “बांग्लादेश में हिंदुओं ने भागने के बजाय एकजुट होकर प्रतिरोध करने का विकल्प चुना है।”
भागवत ने कहा कि आरएसएस उनके हित के लिए हरसंभव प्रयास करेगा। उन्होंने कहा कि देश को तोड़ने की कोशिश करने वाली ताकतें खुद ही विघटित हो जाएंगी और लोगों को 2047 तक “अखंड भारत” की कल्पना करनी चाहिए।
अपने कार्यकाल से जुड़े एक सवाल के जवाब में भागवत ने कहा कि संघ जब भी उनसे आरएसएस प्रमुख के पद से हटने के लिए कहेगा, वह इस्तीफा दे देंगे। उन्होंने कहा कि 75 साल की उम्र पार कर लेने के बावजूद संघ ने उनसे काम जारी रखने के लिए कहा है।
भागवत ने कहा, “मैं 75 साल की उम्र पार कर चुका हूं और मैंने आरएसएस को इसकी सूचना भी दे दी थी, लेकिन संगठन ने मुझसे काम जारी रखने को कहा। जब भी आरएसएस मुझसे पद छोड़ने के लिए कहेगा, मैं पद छोड़ दूंगा, लेकिन काम से सेवानिवृत्ति कभी नहीं होगी।”
स्थानीय भाषाओं की प्रधानता पर जोर देते हुए भागवत ने कहा कि अंग्रेजी आरएसएस के कामकाज में कभी भी संचार का माध्यम नहीं होगी।
उन्होंने कहा, “हम भारतीयों के साथ काम करना चाहते हैं। जहां भी अंग्रेजी आवश्यक होगी, हम उसका इस्तेमाल करेंगे। हमें इससे कोई आपत्ति नहीं है।”
भागवत ने कहा कि आरएसएस में समुदाय आधारित प्रतिनिधित्व नहीं है और स्वयंसेवक अपने काम के आधार पर पदोन्नति पाते हैं।
उन्होंने कहा, “अनुसूचित जाति (एससी) या अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदाय से जुड़ा होना अयोग्यता नहीं है, ठीक उसी तरह जैसे ब्राह्मण होना संघ प्रमुख बनने के लिए वांछित योग्यता नहीं है।”
भागवत ने कहा कि आज जाति का अस्तित्व काफी हद तक राजनीतिक उद्देश्यों और स्वार्थी हितों के लिए है, क्योंकि इसका पारंपरिक व्यवसाय आधारित आधार लुप्त हो चुका है।
उन्होंने कहा कि नेता जाति के नाम पर वोट मांगते हैं, क्योंकि जातिगत पहचान समाज में गहराई से समाई हुई है।
संघ प्रमुख ने जाति आधारित संघर्षों से निपटने के लिए संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया।
जनसंख्या असंतुलन के बारे में बात करते हुए भागवत ने धर्मांतरण, घुसपैठ और कम जन्म दर को इसके लिए जिम्मेदार तीन प्रमुख कारक बताया। उन्होंने लोगों का धर्मांतरण कराने के लिए बल, प्रलोभन और छल का सहारा लिए जाने की निंदा की और कहा कि जो लोग अपने मूल धर्म में लौटना चाहते हैं, उनके लिए “घर वापसी” ही एकमात्र उपाय है।
भारत की जनसंख्या नीति से जुड़े एक सवाल के जवाब में भागवत ने कहा कि निर्धारित प्रजनन अनुपात 2.1 को अगर पूर्णांक में बदला जाए, तो इसका मतलब प्रभावी रूप से तीन बच्चे होते हैं।
संघ प्रमुख ने कहा, “हर तरह के वैज्ञानिक शोध सुझाव देते हैं कि एक परिवार में तीन बच्चे होने चाहिए।” हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह व्यक्तिगत पसंद का मामला है और एक व्यापक सामाजिक मुद्दा बना हुआ है।
भागवत ने घुसपैठ के मुद्दे पर कहा कि आरएसएस कार्यकर्ता भाषा के माध्यम से संदिग्ध घुसपैठियों की पहचान करते हैं और अधिकारियों को उनके बारे में सूचना देते हैं।
उन्होंने कहा कि घुसपैठियों की पहचान और निर्वासन की प्रक्रिया शुरू हो गई है, जो अभी धीमी गति से चल रही है, लेकिन इसमें तेजी आएगी।
भागवत ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभ्यास का हवाला दिया, जिसके तहत कुछ व्यक्तियों को गैर-नागरिक के रूप में पहचाना गया है और उनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं।
एक अन्य सवाल के जवाब में भागवत ने कहा कि कोई बहुसंख्यक या अल्पसंख्यक (समुदाय) नहीं है, “हम सब एक ही समाज हैं।”
धर्म के बारे में भागवत ने कहा कि इस्लाम को शांति का धर्म कहा जाता है, लेकिन आध्यात्मिकता न होने पर शांति नहीं दिखाई देती।
संघ प्रमुख ने कहा कि आज इस्लाम और ईसाई धर्म में जो कुछ देखा जा रहा है, वह ईसा मसीह और पैगंबर मोहम्मद की शिक्षाओं के अनुसार नहीं है। उन्होंने “वास्तविक इस्लाम और ईसाई धर्म” के अनुसरण की आवश्यकता पर जोर दिया।
भागवत ने मुस्लिम और ईसाई समुदाय के लोगों के साथ विश्वास, मित्रता और संवाद कायम करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के बारे में एक सवाल के जवाब में भागवत ने कहा कि यूसीसी का निर्माण सभी को विश्वास में लेकर किया जाना चाहिए और इससे मतभेद नहीं पैदा होने चाहिए।
भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए अंतरिम व्यापार समझौते के बारे में आरएसएस प्रमुख ने कहा कि भारत अलग-थलग नहीं रह सकता और समझौते ऐसे होने चाहिए, जिनसे दोनों पक्षों को लाभ हो और यह सुनिश्चित हो कि देश को कोई नुकसान न हो।
भागवत ने कहा कि आरएसएस भ्रष्टाचार को उजागर करने में विश्वास रखता है और इसके खिलाफ लड़ने वालों का समर्थन करता है।
उन्होंने कहा, “हमारे स्वयंसेवकों से भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने वालों का समर्थन करने के लिए कहा जाता है। आरएसएस भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कानूनों और विधानों का पक्षधर है। वह भ्रष्ट लोगों के खिलाफ कार्रवाई का समर्थन करेगा।”
हिंदुत्व विचारक वीडी सावरकर को ‘भारत रत्न’ से अलंकृत किए जाने की लंबे समय से जारी मांग पर भागवत ने कहा कि अगर उन्हें (सावरकर को) यह सम्मान प्रदान किया जाता है, तो इसकी प्रतिष्ठा और बढ़ जाएगी।
आरएसएस के शताब्दी वर्ष कार्यक्रम में रवीना टंडन, विकी कौशल, अनन्या पांडे, करण जौहर, मधुर भंडारकर, रमेश तौरानी और पंडित हृदयनाथ मंगेशकर सहित कई दिग्गज फिल्मी हस्तियों ने शिरकत की।
भाषा पारुल नरेश
नरेश

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