जरांगे का सरकार पर मराठा समुदाय की ‘कठोर अग्निपरीक्षा’ लेने का आरोप, आंदोलन पर अडिग

जरांगे का सरकार पर मराठा समुदाय की 'कठोर अग्निपरीक्षा' लेने का आरोप, आंदोलन पर अडिग

जरांगे का सरकार पर मराठा समुदाय की ‘कठोर अग्निपरीक्षा’ लेने का आरोप, आंदोलन पर अडिग
Modified Date: May 29, 2026 / 08:39 pm IST
Published Date: May 29, 2026 8:39 pm IST

जालना, 29 मई (भाषा) मराठा आरक्षण मुद्दे पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने से एक दिन पहले कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने शुक्रवार को देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार पर मराठा समुदाय के साथ भेदभाव करने और उसे ‘कठोर अग्निपरीक्षा’ से गुजरने के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया।

उन्होंने यह भी कहा कि वह शनिवार से आंदोलन शुरू करने पर अडिग हैं, जिसे उन्होंने ‘अब तक का सबसे कठिन’ और ‘अभूतपूर्व’ बताया।

जरांगे ने घोषणा की है कि वह मराठा समुदाय की ‘‘अधूरी’’ मांगों को लेकर 30 मई से महाराष्ट्र में जालना जिले के अंतरवाली सराटी में अनशन शुरू करेंगे। यह स्थान मुंबई से करीब 400 किलोमीटर दूर है। उन्होंने चिलचिलाती धूप में बिना किसी आश्रय के भूख हड़ताल करने का फैसला किया है।

जरांगे मांग कर रहे हैं कि सभी मराठाओं को कुनबी माना जाए। कुनबी कृषक जाति है, जो ओबीसी श्रेणी में शामिल है। मराठाओं को कुनबी माने जाने पर मराठा समुदाय के लोग सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण के पात्र हो जाएंगे। हालांकि, ओबीसी वर्गों को डर है कि मराठाओं को इस श्रेणी में शामिल करने से उनके आरक्षण पर असर पड़ेगा।

जरांगे ने शुक्रवार को संवाददाताओं से कहा कि पिछले अनशनों से उनकी सेहत पर गंभीर असर पड़ा है लेकिन वह अपना आंदोलन जारी रखने को लेकर दृढ़ हैं।

जरांगे ने कहा, ‘मुझे उपवास पसंद नहीं है, लेकिन सत्ता में बैठे लोग मराठा समुदाय की क्रूर अग्निपरीक्षा ले रहे हैं। आंदोलन को दबाने और अहंकार दिखाने की भाषा अब बंद होनी चाहिए। अगर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस में हिम्मत है तो उन्हें मेरी तरह मई की इस चिलचिलाती गर्मी में कम से कम दो दिन बैठना चाहिए।’

सरकार द्वारा आंदोलन को रोकने के लिए परोक्ष प्रयास किए जाने की खबरों पर मराठा आरक्षण कार्यकर्ता ने कहा कि उनके पास ‘अनौपचारिक जानकारी’ है कि सरकार का कोई व्यक्ति उनसे बातचीत के लिए संपर्क कर सकता है।

उन्होंने कहा, ‘मुझे इस बारे में कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है कि वार्ता के लिए कौन आ रहा है, लेकिन मुझे जानकारी मिली है कि कोई आ सकता है। हम उनकी बात सुनेंगे, लेकिन किसी भी परिस्थिति में 30 मई से निर्धारित भूख हड़ताल वापस नहीं ली जाएगी।’

जरांगे ने आरोप लगाया कि सरकार ने पिछले 10 महीनों से मराठा आरक्षण से संबंधित निर्णयों में केवल देरी की है और कोई ठोस राहत प्रदान नहीं की है।

जरांगे ने कहा कि सरकार मराठा समुदाय के सदस्यों को कुनबी जाति प्रमाण पत्र और वैधता दस्तावेज उपलब्ध कराने में विफल रही है।

उन्होंने आरोप लगाया, ‘मराठा छात्रों को न तो प्रमाण पत्र मिल रहे हैं और न ही उनकी वैधता की मंजूरी। सैकड़ों छात्र पीड़ित हैं और उनका शैक्षणिक करियर बर्बाद हो रहा है।’

अपने पिछले मराठा आरक्षण आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दायर मामलों के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि सरकार के साथ एक समझौता हुआ था जिसके तहत सरकार ने 1,500 मामलों में से लगभग 800 मामले वापस लेने का फैसला किया था।

उन्होंने कहा, ‘अब सरकार का दावा है कि केवल 64 मामले बचे हैं। हम इस मुद्दे पर आमने-सामने चर्चा के लिए तैयार हैं।’

उन्होंने मुख्यमंत्री के छत्रपति संभाजीनगर दौरे के दौरान विरोध के प्रतीक के रूप में काले झंडे लहराने वाले मराठा समुदाय के युवाओं को हिरासत में लेने के लिए पुलिस की आलोचना की।

उन्होंने कहा, ‘युवा गुस्से में हैं। सरकार को स्थिति को उग्र आंदोलन में तब्दील नहीं होने देना चाहिए।’

जरांगे ने मुख्यमंत्री फडणवीस पर भाजपा और उसके सहयोगी दलों के कई नेताओं को राजनीतिक रूप से दरकिनार करने का भी आरोप लगाया।

आज सुबह पत्रकारों से जरांगे ने कहा कि उनके पिछले उपवासों ने उनके स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाला था, लेकिन वह अपना आंदोलन जारी रखने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे बहुत तकलीफ हो रही है। मेरे पेट में जलन हो रही है और मुझे बहुत दर्द हो रहा है। मैं अपने समुदाय के बच्चों के कल्याण के लिए इस हालत में भी चिलचिलाती धूप में खड़ा हूं। सरकार को कम से कम यह समझना चाहिए।’’

उन्होंने सरकार पर मराठा समुदाय के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, ‘‘आप सत्ता में इसलिए आए क्योंकि मराठाओं ने बड़ी संख्या में आपको वोट दिया। फिर ऐसा अन्याय क्यों? ओबीसी और मराठाओं के बीच यह भेदभाव क्यों? अगर हमने कुछ गलत किया है तो हमें फांसी पर चढ़ा दीजिए लेकिन गरीब मराठाओं की जिंदगी क्यों बर्बाद कर रहे हैं?’’

जरांगे ने आरोप लगाया कि सरकार पहले लोगों की चिंताओं का समाधान करने के बजाय चुनावों और दलों की आंतरिक राजनीति में व्यस्त है। उन्होंने कहा, ‘‘आप अपनी राजनीति में, चुनाव और उम्मीदवारों के चयन में व्यस्त हैं। आप लोगों को कब खुश करेंगे? गरीब लोग आपको कोसेंगे।’’

यह पूछे जाने पर कि क्या वह अनशन वापस लेंगे, जरांगे ने कहा कि वह पहले सरकार के रुख और मंत्रियों द्वारा लाए जाने वाले प्रस्तावों का आकलन करेंगे।

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे देखने दीजिए कि सरकार का रुख क्या है। और कौन-कौन आ रहा है। लेकिन मैं आपको साफ बता रहा हूं कि 30 तारीख को अनशन निश्चित रूप से होगा। गरीबों के कल्याण के लिए यह अभूतपूर्व होगा।’’

इससे पहले दिन में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता प्रसाद लाड ने जरांगे से अपना प्रस्तावित अनिश्चितकालीन अनशन वापस लेने की अपील की, जबकि राष्ट्रीय अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) महासंघ के अध्यक्ष बबनराव तायवाडे ने चेतावनी दी कि ओबीसी के आरक्षण को प्रभावित करने वाले किसी भी कदम के खिलाफ राज्यव्यापी प्रदर्शन किए जाएंगे।

विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) लाड ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर जरांगे से भीषण गर्मी में अनशन नहीं करने की अपील की।

लाड ने कहा, ‘‘मैं अपना वादा निभाने आ रहा हूं… मैं समिति के अध्यक्ष को भी अपने साथ ला रहा हूं लेकिन मुझे एक भाई के नाते आपका वचन चाहिए। इस भीषण गर्मी में खुद को कष्ट मत दीजिए… अब अनशन करना आपके स्वास्थ्य के लिए असहनीय होगा। हम आपकी अपेक्षाएं पूरी करने आ रहे हैं… हमारे मराठा समुदाय को आपकी जरूरत है।”

इस बीच, तायवाडे ने संवाददाताओं से कहा कि ओबीसी समुदाय ‘‘देखो और इंतजार करो’’ की स्थिति में है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ओबीसी समुदाय के आरक्षण पर असर पड़ा तो इसके गंभीर परिणाम होंगे।

उन्होंने कहा, ‘‘हमें जरांगे की मांगों या उनके आंदोलन से कोई आपत्ति नहीं है लेकिन मूल ओबीसी आरक्षण को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। यदि ओबीसी आरक्षण में जरा भी कमी आती है तो समुदाय पूरे राज्य में जोरदार विरोध प्रदर्शन करेगा।’’

भाषा

शुभम वैभव

वैभव


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