प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री को पद से हटाने संबंधी विधेयक पर जेपीसी ने महाराष्ट्र सरकार के साथ की चर्चा
प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री को पद से हटाने संबंधी विधेयक पर जेपीसी ने महाराष्ट्र सरकार के साथ की चर्चा
मुंबई, 27 अप्रैल (भाषा) आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों को पद से हटाने के विधेयक पर विचार-विमर्श कर रही संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की प्रमुख अपराजिता सारंगी ने सोमवार को कहा कि जेपीसी सभी हितधारकों की राय ले रही है।
महाराष्ट्र सरकार के साथ बातचीत के बाद सारंगी ने कहा कि प्रस्तावित कानून भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने में मील का पत्थर साबित होगा।
संविधान (130वां संशोधन) विधयेक, 2025 का उद्देश्य यह है कि अगर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों को पांच साल या उससे अधिक अवधि की जेल की सजा वाले अपराध के सिलसिले में गिरफ्तार किया जाता है और लगातार 30 दिन से ज्यादा समय तक हिरासत में रखा जाता है, तो उन्हें स्वत: ही 31वें दिन पद छोड़ना पड़ेगा।
सारंगी ने कहा कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मुंबई में बातचीत के दौरान समिति को तीन ‘‘बहुत जरूरी’’ सुझाव दिए, जिनपर गौर किया जाएगा।
उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘समिति ने मुंबई में महाराष्ट्र सरकार, अधिकारियों और महाराष्ट्र मानवाधिकार आयोग के साथ बातचीत की। हम बार एसोसिएशन, न्यायिक अकादमी महाराष्ट्र और राष्ट्रीय विधि विद्यापीठ, मुंबई की भी राय लेंगे।’’
सारंगी ने कहा कि समिति सत्ता पक्ष या विपक्ष के सभी हितधारकों की राय पर विचार-विमर्श कर रही है, और विश्लेषण करने के बाद अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी तथा उसे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सौंपेगी।
सारंगी ने कहा कि समिति संविधान (130वां संशोधन) विधेयक 2025, जम्मू कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक 2025, और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकार (संशोधन) विधेयक 2025 पर विचार-विमर्श कर रही है।
जेपीसी अध्यक्ष ने कहा कि प्रस्तावित संशोधन संविधान के अनुच्छेद 75, 164 और 239एए में बदलाव का प्रावधान करते हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मंत्री, मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री समेत उच्च संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्ति जनता के प्रति जवाबदेह रहें।
उन्होंने कहा, ‘‘कोई भी मंत्री, मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री, अगर पांच साल या उससे अधिक की सजा वाले अपराधों के मामलों में गिरफ्तार होता है और लगातार 30 दिन तक हिरासत में रहता है, तो उसे 31वें दिन पद छोड़ना होगा।’’
इस पहल को राजनीति को अपराधमुक्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम बताते हुए, सारंगी ने कहा कि यह विधेयक देश में लोकतंत्र को अधिक साफ-सुथरा, मजबूत और ज्यादा जवाबदेह बनाने की दिशा में एक बहुत जरूरी कदम है। उन्होंने कहा कि 31 सांसदों वाली जेपीसी, 4 दिसंबर 2025 को नयी दिल्ली में अपनी पहली बैठक के बाद से ही विचार-विमर्श कर रही है।
उन्होंने कहा कि समिति अब ओडिशा सरकार और अन्य हितधारकों से परामर्श करने के लिए भुवनेश्वर जाएगी।
भाषा सुभाष दिलीप
दिलीप

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