महाराष्ट्र: नगर निकायों में भाजपा का कांग्रेस व एआईएमआईएम से गठबंधन, फडणवीस और शिवसेना का विरोध
महाराष्ट्र: नगर निकायों में भाजपा का कांग्रेस व एआईएमआईएम से गठबंधन, फडणवीस और शिवसेना का विरोध
मुंबई, सात जनवरी (भाषा) भाजपा ने एक चौंकाने वाले कदम के तहत महाराष्ट्र की दो नगर पालिका परिषदों में कांग्रेस और एआईएमआईएम के साथ चुनाव बाद गठबंधन कर लिया जिससे सत्ताधारी और विपक्षी दलों के प्रदेश नेतृत्व में नाराजगी फैल गई। कांग्रेस ने इनमें से एक स्थानीय निकाय में अपने 12 नवनिर्वाचित पार्षदों को निलंबित कर दिया है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि इस तरह की व्यवस्था पार्टी नेतृत्व द्वारा अनुमोदित नहीं थी और अनुशासन का उल्लंघन है तथा स्थानीय नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, जबकि राज्य में भाजपा की सहयोगी पार्टी शिवसेना ने इसे ‘गठबंधन धर्म’ के प्रति विश्वासघात बताया।
भाजपा ने 20 दिसंबर को हुए स्थानीय चुनावों के बाद अपनी कट्टर प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस और अजित पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के साथ ‘अंबरनाथ विकास आघाडी’ के बैनर तले गठबंधन करके अंबरनाथ नगर पालिका परिषद का नेतृत्व संभाला और सहयोगी शिवसेना (एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली) को दरकिनार कर दिया।
भाजपा ने अकोला जिले की अकोट नगर पालिका परिषद में असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली अखिल भारतीय मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) और अन्य पार्टियों के साथ इसी तरह का गठबंधन किया।
इस घटनाक्रम से असहज स्थिति में आ गई कांग्रेस ने बुधवार को भाजपा के साथ गठबंधन करने के लिए अंबरनाथ नगर पालिका परिषद के अपने 12 नवनिर्वाचित पार्षदों और ब्लॉक अध्यक्ष को निलंबित कर दिया।
शिवसेना (उबाठा) ने भी भाजपा की आलोचना करते हुए कहा कि यह सत्तारूढ़ पार्टी के दोहरे मापदंड को दर्शाता है और दिखाता है कि वह सत्ता हथियाने के लिए कुछ भी कर सकती है।
अंबरनाथ में भाजपा ने कांग्रेस और राकांपा के साथ चुनाव बाद समझौता किया और 31 सीट के साथ बहुमत साबित किया, जबकि शिवसेना 27 सदस्यों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है।
शिवसेना ने 60 सदस्यीय नगर पालिका परिषद के चुनाव में 27 सीट जीतीं, जो बहुमत से मात्र चार कम थीं। भाजपा को 14 सीट, कांग्रेस को 12, राकांपा को चार सीट मिलीं, जबकि दो सीट पर निर्दलीय निर्वाचित हुए। एक निर्दलीय के समर्थन से, तीन दलों के गठबंधन की ताकत बढ़कर 32 पार्षद हो गई है, जो बहुमत के लिए जरूरी 30 के आंकड़े को पार कर गई।
भाजपा पार्षद तेजश्री करंजुले पाटिल ने शिवसेना की मनीषा वालेकर को हराकर नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष का चुनाव जीता और बुधवार को शपथ ली।
हालांकि, स्थानीय स्तर पर लिया गया यह निर्णय किसी भी संबंधित पार्टी के प्रदेश नेतृत्व को रास नहीं आया। कांग्रेस ने अंबरनाथ में नवनिर्वाचित 12 पार्षदों और ब्लॉक अध्यक्ष प्रदीप पाटिल को निलंबित कर दिया। कांग्रेस का कहना है कि स्थानीय निकाय में भाजपा के साथ गठबंधन का निर्णय पार्टी के राज्य नेतृत्व को सूचित किए बिना लिया गया था।
कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने कहा, ‘‘कांग्रेस और भाजपा के बीच कोई औपचारिक गठबंधन नहीं है, लेकिन गठबंधन बिना अनुमति के किया गया है।’’
एक समाचार चैनल से बात करते हुए मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि ऐसे गठबंधन किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं होंगे और स्थानीय नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं यह स्पष्ट कर रहा हूं कि कांग्रेस या एआईएमआईएम के साथ कोई भी गठबंधन स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि किसी स्थानीय नेता ने ऐसा निर्णय अपनी मर्जी से लिया है, तो यह अनुशासनहीनता है और उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।’’ उन्होंने आगे कहा कि ऐसे गठबंधनों को रद्द करने के निर्देश पहले ही जारी किए जा चुके हैं।
शिवसेना (उबाठा) सांसद संजय राउत ने कहा, ‘‘अकोट और अंबरनाथ में जो हुआ, उससे भाजपा का गैरजिम्मेदाराना रवैया साफ झलकता है। सत्ता हथियाने के लिए पार्टी किसी से भी गठबंधन कर सकती है।’’
भाजपा, राकांपा और शिवसेना सत्ताधारी महायुति गठबंधन में सहयोगी हैं। शिवसेना ने इन गठबंधनों को ‘अनैतिक और अवसरवादी’ बताया है।
शिवसेना विधायक डॉ. बालाजी किनीकर ने इसे ‘गठबंधन धर्म’ के प्रति विश्वासघात और भाजपा के ‘कांग्रेस-मुक्त भारत’ के राष्ट्रीय नारे के विपरीत बताया।
समूह के नेता नियुक्त किए गए भाजपा पार्षद अभिजीत करंजुले पाटिल ने मीडिया को बताया कि यह गठबंधन अंबरनाथ को ‘भ्रष्टाचार और धमकियों’ से मुक्त कराने के लिए किया गया है।
एकनाथ शिंदे के बेटे और शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने कहा, “जिन पार्टियों के खिलाफ हम चुनाव लड़ते हैं, उनसे हाथ मिलाना ठीक नहीं है। अगर कुछ लोग सिर्फ सत्ता पाने के लिए ऐसा कर रहे हैं, तो वरिष्ठ नेताओं को इस पर ध्यान देना चाहिए।”
उन्होंने कहा, “जिन लोगों के खिलाफ एकनाथ शिंदे ने बगावत की थी, उन्हीं से हाथ मिलाना स्वार्थ वाला कदम है। कुछ लोगों को समझना चाहिए कि सत्ता ही सब कुछ नहीं होती।”
अकोट में भाजपा ने ‘अकोट विकास मंच’ बनाया, जिसमें एआईएमआईएम के अलावा उद्धव ठाकरे की शिवसेना (उबाठा), शिवसेना, राकांपा, शरद पवार की राकांपा (एसपी) और बच्छू कडू की प्रहार जनशक्ति पार्टी शामिल हैं।
भाजपा ने 35 सदस्यीय परिषद में 11 सीट जीतीं, एआईएमआईएम को दो सीट पर जीत मिली। अन्य पार्टियों के समर्थन से गठबंधन के सदस्यों की संख्या बढ़कर 25 हो गई।
अकोला से भाजपा के सांसद अनूप धोत्रे ने कहा कि एआईएमआईएम के चार पार्षदों ने अपनी पार्टी छोड़कर भाजपा से हाथ मिला लिया।
एआईएमआईएम नेता और पूर्व सांसद इम्तियाज जलील ने कहा, “हमारा राजनीतिक रुख भाजपा के खिलाफ है। मैंने पार्टी के प्रभारी से तुरंत मुझे स्थिति की जानकारी देने को कहा है।”
उन्होंने कहा कि ओवैसी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उनकी पार्टी का भाजपा के साथ कोई समझौता नहीं है।
भाजपा की माया धुले महापौर चुनी गई हैं। यह गठबंधन अकोला जिला प्रशासन में बुधवार को पंजीकृत किया गया, ताकि 13 जनवरी को होने वाले उप-महापौर और समिति चुनावों से पहले सभी तैयारियां पूरी की जा सकें।
छह सीट जीतने वाली कांग्रेस, और दो सीट पर जीत हासिल करने वाली वंचित बहुजन आघाडी विपक्ष में हैं।
अकोला से भाजपा के विधायक रणधीर सावरकर ने कहा कि अकोट में एआईएमआईएम के पांच पार्षदों में से चार ने ‘पार्टी की कट्टर व सांप्रदायिक सोच को अस्वीकार करके” अकोट विकास मंच में शामिल होने का निर्णय लिया।
उन्होंने कहा, “चुनाव जीतने वाले एआईएमआईएम के पांचवे सदस्य हमारे संपर्क से बाहर हैं। हमने एआईएमआईएम के साथ गठबंधन नहीं किया, और भाजपा के मूल सिद्धांतों से कोई समझौता नहीं हुआ है।”
शिवसेना (उबाठा) नेता सचिन अहीर ने गठबंधन को लेकर भाजपा की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यह सत्ताधारी पार्टी के दोहरे मापदंड को दर्शाता है और दिखाता है कि वह सत्ता हथियाने के लिए कुछ भी कर सकती है।
भाषा संतोष वैभव
वैभव

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