महाराष्ट्र सरकार एआई के इस्तेमाल के लिए एसओपी की खातिर समिति बनाएगी: मंत्री

महाराष्ट्र सरकार एआई के इस्तेमाल के लिए एसओपी की खातिर समिति बनाएगी: मंत्री

महाराष्ट्र सरकार एआई के इस्तेमाल के लिए एसओपी की खातिर समिति बनाएगी: मंत्री
Modified Date: June 30, 2026 / 06:11 pm IST
Published Date: June 30, 2026 6:11 pm IST

मुंबई, 30 जून (भाषा) महाराष्ट्र सरकार ने मंगलवार को विधानसभा में कहा कि वह कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के इस्तेमाल के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने की खातिर 30 दिनों के भीतर विशेषज्ञों की एक कमेटी बनाएगी। हालांकि विपक्षी विधायकों ने उनकी सहमति के बिना विधान भवन में लगाए गए ‘‘फेशियल रिकग्निशन सिस्टम’’ पर आपत्ति जताई।

गृह राज्य मंत्री योगेश कदम ने एआई से जुड़े उपकरणों के गलत इस्तेमाल पर पेश ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का जवाब देते हुए कहा कि शासन और अन्य प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए इस प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल बढ़ रहा है लेकिन इसका गलत इस्तेमाल भी हो सकता है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सरकार को निर्देश दिया है कि एआई के इस्तेमाल के संबंध में क्षेत्र के विशेषज्ञों को शामिल कर एक समिति के ज़रिए एसओपी तैयार की जाए।

कदम ने कहा, ‘‘समिति 30 दिन के भीतर बनाई जाएगी और उम्मीद है कि वह चार से छह महीनों में अपनी रिपोर्ट सौंप देगी। रिपोर्ट केंद्र को भेजी जाएगी ताकि नेशनल एआई पॉलिसी और कानूनी ढांचा बनाते समय इसकी सिफारिशों पर विचार किया जा सके।’’

उन्होंने बताया कि मौजूदा कानूनों में पहले से ही ऐसे प्रावधान हैं जिनके तहत एआई से जुड़े उपकरणों (जैसे स्मार्ट ग्लास) का इस्तेमाल कर लोगों की चुपके से रिकॉर्डिंग करने और उनकी निजता का उल्लंघन करने पर कार्रवाई की जा सकती है।

चर्चा के दौरान, शिवसेना (उबाठा) के विधायक आदित्य ठाकरे ने सवाल उठाया कि विधायकों, मंत्रियों और पूर्व विधायकों की सहमति लिए बिना विधान भवन परिसर में ‘‘फेशियल रिकग्निशन सिस्टम’’ कैसे लगाया गया।

ठाकरे ने इस मुद्दे पर सरकार से विस्तृत बयान की मांग की। कांग्रेस के असलम शेख ने कहा कि विधायकों का कभी भी विधानसभा के अंदर बायोमेट्रिक रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ तो ‘‘फेशियल रिकग्निशन डेटाबेस’’ कैसे बनाया गया।

मंत्री ने कहा, ‘मेरी जानकारी के अनुसार, फेशियल रिकग्निशन सिस्टम उन तस्वीरों का इस्तेमाल कर तैयार किया गया है जो पहले से ही विधानसभा के पास मौजूद थीं। हालांकि, यह मामला विधानसभाध्यक्ष के अधिकार क्षेत्र में है और वह उचित निर्देश जारी करेंगे। अगर वह जांच का आदेश देते हैं, तो पुलिस जांच करेगी।’’

भाषा अविनाश पवनेश

पवनेश


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