महाराष्ट्र सरकार झुग्गी संबंधी कानून की समीक्षा के लिए समिति गठित करे : बंबई उच्च न्यायालय
महाराष्ट्र सरकार झुग्गी संबंधी कानून की समीक्षा के लिए समिति गठित करे : बंबई उच्च न्यायालय
मुंबई, आठ मई (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को महाराष्ट्र सरकार को निर्देश दिया कि वह चार सप्ताह के भीतर एक विशेषज्ञ समिति गठित करे, जो महाराष्ट्र झुग्गी क्षेत्र (सुधार, सफाई और पुनर्विकास) अधिनियम के क्रियान्वयन की समीक्षा करे।
न्यायमूर्ति जी. एस. कुलकर्णी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेथना की पीठ ने कहा कि मुंबई और राज्य के अन्य शहरों को ‘‘झुग्गी-मुक्त’’ बनाने के अभी हकीकत से ‘‘दूर नजर आने वाले सपने’’ को पूरा करने के लिए इस कानून को अधिक प्रभावी और सक्षम बनाने की आवश्यकता है।
यह आदेश अदालत ने एक स्वत: संज्ञान याचिका पर दिया। यह याचिका उच्चतम न्यायालय के उस निर्देश के बाद दायर की गयी है, जिसमें कानून के अनुरूप कामकाज और उसके क्रियान्वयन की समीक्षा करने को कहा गया था।
अदालत ने शुक्रवार को फैसला सुनाते हुए कहा कि उसे दृढ़ता से महसूस होता है कि कुछ ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर अधिकारियों और कानून लागू करने वाली एजेंसियों को बेहद गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।
अदालत ने टिप्पणी की कि नगर नियोजन की आदर्श स्थिति पीछे छूटती दिखाई दे रही है, खासकर सरकारी भूखंडों के मामले में।
अदालत ने कहा कि विशेषज्ञ समिति में पर्याप्त सदस्य होने चाहिए, ताकि कानून के क्रियान्वयन की समीक्षा कर उसे अधिक प्रभावी बनाया जा सके। इसका उद्देश्य सरकार को ‘‘मुंबई और महाराष्ट्र के अन्य बड़े शहरों को झुग्गी-मुक्त बनाने के अभी हकीकत से दूर नजर आ रहे सपने’’ को साकार करने में सक्षम बनाना है।
उच्च न्यायालय ने कहा कि तमाम प्रयासों के बावजूद अधिकारी शहर से झुग्गियों को खत्म करने में विफल रहे हैं और इस दिशा में क्षेत्रवार व्यवस्थित तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है।
अदालत ने कहा कि भले ही यह ‘‘अत्यंत कठिन कार्य’’ हो, लेकिन यदि जिम्मेदारी संभाल रहे लोगों में दृढ़ इच्छाशक्ति और जनहित के लिए ईमानदार प्रयास करने की भावना हो, तो 21वीं सदी की ओर बढ़ते इस शहर में इसे असंभव नहीं कहा जा सकता।
भाषा गोला धीरज
धीरज

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