मुंबई, एक अगस्त (भाषा) महाराष्ट्र सरकार जल्द ही एक व्यापक एम्बुलेंस नीति लागू करेगी, जिसके तहत आपातकालीन चिकित्सा परिवहन व्यवस्था को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाया जाएगा तथा प्रत्येक पंजीकृत एम्बुलेंस की वास्तविक समय में डिजिटल निगरानी की जाएगी। राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने शनिवार को यह जानकारी दी।
सरनाइक ने एक बयान में कहा कि महाराष्ट्र राज्य एम्बुलेंस नीति का मकसद एम्बुलेंस से जुड़ी पूरी व्यवस्था को बेहतर बनाना है, जिसमें पंजीकरण और एंबुलेंस भेजने, किराया नियमन और अस्पताल एकीकरण तक की प्रक्रियाएं शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि एम्बुलेंस केवल परिवहन का साधन नहीं, बल्कि चिकित्सीय आपात स्थितियों में जीवन बचाने वाली महत्वपूर्ण सेवा है। इसलिए इसके संचालन को विनियमित करना और पूरे महाराष्ट्र में सेवा मानकों में सुधार करना आवश्यक है।
सरनाइक के अनुसार, राज्य की नयी ‘एमईएमएस-108’ सार्वजनिक-निजी भागीदारी परियोजना के तहत वर्तमान में लगभग 1,076 एम्बुलेंस संचालित हो रही हैं, जबकि निजी अस्पतालों, धर्मार्थ संस्थाओं और गैर-सरकारी संगठनों द्वारा लगभग 4,500 से 5,000 एम्बुलेंस चलाई जा रही हैं।
हालांकि, नागरिकों को एम्बुलेंस की वर्तमान स्थिति, उपलब्धता, उसके पहुंचने के अनुमानित समय, उसमें उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं या किराया संरचना संबंधी विश्वसनीय जानकारी उपलब्ध कराने के लिए कोई एकीकृत व्यवस्था नहीं है।
उन्होंने कहा कि इन समस्याओं को हल करने के लिए सरकार एक एकीकृत डिजिटल मंच का प्रस्ताव कर रही है। इसमें नागरिकों, एम्बुलेंस चालकों, एम्बुलेंस में लगे टैबलेट, सरकारी अधिकारियों (जिनमें क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय यानी आरटीओ भी शामिल है) और स्वास्थ्य विभाग के लिए चार अलग-अलग एप्लीकेशन होंगे।
बयान के अनुसार, निजी एम्बुलेंस संचालकों द्वारा मनमाना किराया वसूलने पर रोक लगाने के लिए प्रत्येक पंजीकृत एम्बुलेंस के लिए ऐप पर किराया सूची प्रदर्शित करना अनिवार्य किया जाएगा।
भाषा
शुभम माधव
माधव