एनआईए अदालत का जाली नोट मामले में दाऊद इब्राहिम के सहयोगी से जुड़े आरोपी को बरी करने से इनकार

एनआईए अदालत का जाली नोट मामले में दाऊद इब्राहिम के सहयोगी से जुड़े आरोपी को बरी करने से इनकार

एनआईए अदालत का जाली नोट मामले में दाऊद इब्राहिम के सहयोगी से जुड़े आरोपी को बरी करने से इनकार
Modified Date: January 17, 2026 / 08:58 pm IST
Published Date: January 17, 2026 8:58 pm IST

मुंबई, 17 जनवरी (भाषा) राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की एक विशेष अदालत ने जाली नोट (एफआईसीएन) की तस्करी के मामले में भगोड़े गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम के सहयोगी जावेद चिकना से कथित तौर पर जुड़े एक व्यक्ति को बरी करने से इनकार कर दिया है।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि इस मामले में आरोपी नासिर चौधरी की कथित भूमिका को लेकर उसके खिलाफ मुकदमा चलाने हेतु ‘पर्याप्त से अधिक सबूत’ मौजूद हैं।

विशेष न्यायाधीश चकोर एस बाविस्कर ने 16 जनवरी को अपने आदेश में बचाव पक्ष के इस दावे को खारिज कर दिया कि अभियोजन पक्ष ने चौधरी के खिलाफ सबूत गढ़े थे।

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न्यायाधीश बाविस्कर ने कहा कि ऐसे सिद्धांत की सत्यता का निर्णय केवल पूर्ण सुनवाई के दौरान किया जा सकता है, न कि बरी होने के चरण में।

नवंबर 2021 में, ठाणे में छापेमारी के दौरान मुख्य आरोपी रियाज को 2000 रुपये के 149 जाली नोटों के साथ गिरफ्तार किया गया। रियाज से पूछताछ के आधार पर चौधरी को उसी वर्ष 26 नवंबर को हिरासत में लिया गया था।

एनआईए ने अदालत को बताया कि गिरफ्तारी के बाद चौधरी ने खुलासा किया कि दाऊद इब्राहिम के करीबी सहयोगी और नामित आतंकवादी जावेद चिकना ने उसे 2000 रुपये मूल्य का एक उच्च गुणवत्ता वाला नकली नोट भेजा था।

अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि चौधरी ने कहा था कि उसने नोट को निर्माणाधीन मस्जिद के पीछे छिपाया था। इसी के आधार पर अधिकारियों ने मस्जिद के पीछे निर्माण मलबे के ढेर से नोट बरामद किया।

एनआईए के अनुसार, चौधरी और अन्य सभी आरोपी जावेद चिकना के निर्देश पर जाली नोटों की तस्करी और वितरण में लिप्त हैं।

हालांकि चौधरी ने दावा किया है कि बरामद जाली नोट अभियोजन पक्ष द्वारा जानबूझकर रखा गया था।

उसने कहा कि इसके अलावा, उसके खिलाफ कोई सबूत नहीं है और इसलिए उसे बरी कर दिया जाना चाहिए।

झूठे तरीके से फंसाए जाने के सिद्धांत पर न्यायालय ने कहा,‘‘आरोपी नासिर चौधरी ने ऐसा कोई आधार प्रस्तुत नहीं किया है जिससे यह साबित हो सके कि जांच एजेंसी ने प्रथम दृष्टया बिना किसी पूर्व शत्रुता के उसे फंसाने का प्रयास क्यों किया।’’

न्यायालय ने कहा कि जांच अधिकारी को चौधरी के प्रति कोई द्वेष नहीं प्रतीत होता है।

भाषा राजकुमार माधव

माधव


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