पुणे में लोगों ने अजित दादा को नहीं नकारा, बल्कि मोदी और भाजपा के नेतृत्व को स्वीकारा: फडणवीस
पुणे में लोगों ने अजित दादा को नहीं नकारा, बल्कि मोदी और भाजपा के नेतृत्व को स्वीकारा: फडणवीस
पुणे, 17 जनवरी (भाषा) महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पुणे और पिंपरी-चिंचवड महानगरपालिका चुनावों में जीत के बाद शनिवार को कहा कि जनता ने उपमुख्यमंत्री अजित पवार को नहीं नकारा, बल्कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व को स्वीकारा है।
अजित पवार, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के प्रमुख हैं और यह पार्टी सत्तारूढ़ गठबंधन का हिस्सा है।
पुणे का ‘दादा’ कौन होगा, इस सवाल के जवाब में फडणवीस ने कहा, ‘‘पुणे की जनता ही दादा है और हम उनके सेवक हैं।’’
अजित पवार को मराठी में ‘दादा’ के नाम से पुकारा जाता है।
फडणवीस ने पुणे में एक कार्यक्रम के दौरान पुणे और पिंपरी-चिंचवड महानगरपालिका चुनावों में मिली शानदार जीत के लिए पुणे के नागरिकों को धन्यवाद दिया।
अजित पवार और उनके चाचा शरद पवार के नेतृत्व वाले गुटों ने पुणे और पिंपरी चिंचवड में चुनाव के लिए गठबंधन किया था।
पुणे और पिंपरी चिंचवड को पवार परिवार का गढ़ माना जाता है।
भाजपा ने शुक्रवार को पवार परिवार को चौंकाते हुए पुणे महानगरपालिका की 165 सीट में से 119 पर जीत हासिल की थी और अजित पवार के नेतृत्व वाली राकांपा को केवल 27 सीट से ही संतोष करना पड़ा था।
राकांपा (शप) को सिर्फ तीन सीट पर जीत मिली, जबकि कांग्रेस को 15 सीट पर विजय प्राप्त हुईं।
पिंपरी चिंचवड में भाजपा ने 128 सीट में से 84 पर जीत हासिल कर स्पष्ट बहुमत हासिल किया।
फडणवीस ने कहा, “मैं पुणे एवं पिंपरी चिंचवड के मतदाताओं का भाजपा पर विश्वास जताने और हमें भारी जीत दिलाने के लिए धन्यवाद करता हूं। मैं केवल धन्यवाद नहीं दे रहा हूं, मैं उनका ऋणी हूं। हम इस जनादेश से खुश हैं, लेकिन यह हमें इन शहरों के प्रति हमारी जिम्मेदारी की भी याद दिलाता है।”
यह पूछने पर कि क्या पुणे की जनता ने अजित दादा को नकार दिया, जिसपर मुख्यमंत्री ने कहा, “मैं यह नहीं कहूंगा कि जनता ने दादा को नकार दिया, बल्कि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी, भाजपा और हमारे नेतृत्व को स्वीकार किया है।”
अजित पवार शनिवार को मुंबई में हुई कैबिनेट बैठक में शामिल नहीं हुए।
मुख्यमंत्री ने कहा, “मैंने मतदान के दिन (15 जनवरी) अजित पवार से मुलाकात की थी तब उन्होंने मुझे बताया था कि वह कैबिनेट बैठक में शामिल नहीं हो सकेंगे।”
भाषा जितेंद्र सुरेश
सुरेश

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