संवाद का एक वैध तरीका है विरोध प्रदर्शन: मोहन भागवत

संवाद का एक वैध तरीका है विरोध प्रदर्शन: मोहन भागवत

संवाद का एक वैध तरीका है विरोध प्रदर्शन: मोहन भागवत
Modified Date: August 6, 2026 / 08:04 pm IST
Published Date: August 6, 2026 8:04 pm IST

(फाइल फोटो के साथ)

मुंबई, छह अगस्त (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने बृहस्पतिवार को कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन संवाद का एक वैध तरीका है, लेकिन इसका मकसद विभाजन पैदा करने के बजाय आम सहमति बनाना होना चाहिए।

भागवत ने मुंबई में ‘इंडियाज़ इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशन्स’ (आईआईएमयूएन) के 15वें वर्षगांठ कार्यक्रम में में ‘जेन-जी’ और ‘जेन अल्फा’ के लगभग 2,000 सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘विरोध प्रदर्शन भी बातचीत का एक तरीका है। लोकतंत्र में, विरोध प्रदर्शन आम सहमति बनाने का एक जरिया है। अलग-अलग विचार एक साथ आते हैं और चर्चा के बाद आम सहमति बनती है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘अगर विभिन्न कारणों से बातचीत के जरिए चिंताओं पर ध्यान नहीं दिया जाता, तो लोग आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं। लेकिन इन सबका मकसद आम सहमति बनाना है, न कि विभाजन पैदा करना। जेन-जी की शिकायतें जायज़ हैं और मुझे उनकी ईमानदारी पर भरोसा है।’’

भागवत के इस संवाद को आरएसएस की ओर से ‘जेन-जी’ और ‘जेन अल्फा’ तक पहुंचने की सबसे अहम कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। यह कोशिश ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (कॉजपा) के उस विरोध-प्रदर्शन के बाद हो रही है, जो नीट प्रश्नपत्र लीक को लेकर हुआ था तथा उसके फलस्वरूप केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफ़ा देना पड़ा था।

भागवत ने कहा कि भारत की शिक्षा प्रणाली को लेकर जताई जा रही चिंताएं जायज हैं।

उन्होंने कहा कि संवाद हमेशा पहला कदम होना चाहिए।

भागवत ने कहा, ‘‘बातचीत होनी चाहिए। अगर बातचीत से काम न बने तो आगे क्या किया जाए, इस पर बाद में विचार किया जा सकता है।’’

सरसंघचालक ने कहा कि जेन-जी अपनापन और सम्मान के साथ-साथ ‘तार्किक जवाब’ भी चाहता है, जबकि पिछली पीढ़ियां बिना सवाल किए बड़ों की बात मान लेती थीं।

उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर पाबंदी लगाना इसके नुकसानदेह असर का समाधान नहीं है। उन्होंने कहा कि समाज को आत्म-अनुशासन विकसित करना चाहिए और ऑनलाइन किसी भी बात पर विश्वास करने से पहले विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए।

भागवत ने कहा कि जब तक लोगों का नज़रिया नहीं बदलेगा, तब तक सिर्फ़ नियम-कानून काम नहीं आएंगे।

भाषा

राजकुमार नेत्रपाल

नेत्रपाल


लेखक के बारे में