अकेले चुनाव लड़ने के बावजूद पुणे निगम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी शिवसेना: नीलम गोरहे

अकेले चुनाव लड़ने के बावजूद पुणे निगम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी शिवसेना: नीलम गोरहे

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  • Publish Date - January 13, 2026 / 12:26 PM IST,
    Updated On - January 13, 2026 / 12:26 PM IST

पुणे, 13 जनवरी (भाषा) शिवसेना की वरिष्ठ नेता नीलम गोरहे ने पुणे नगर निगम चुनाव में अपनी पार्टी को “अच्छे परिणाम” मिलने की उम्मीद जताई है, जिससे निगम में निर्णय लेने की प्रक्रिया पर प्रभाव डाला जा सके।

महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महायुति में शामिल एकनाथ शिंदे नीत शिवसेना 15 जनवरी को हो रहे 165 सदस्यीय पुणे निगम का चुनाव अलग लड़ रही है। गठबंधन सहयोगी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ सीट-बंटवारे पर असहमति के कारण पार्टी ने यह फैसला लिया है।

महाराष्ट्र विधान परिषद की उपसभापति गोरहे ने सोमवार रात ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए साक्षात्कार में कहा कि शिवसेना पुणे के सभी वार्ड में मतदाताओं तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

उन्होंने कहा, “उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में एक विशाल रैली आयोजित की गई। मेरे साथ गुलाबराव पाटिल, योगेश कदम, निलेश राणे, किशोर पाटिल और विजय शिवतरे जैसे कई वरिष्ठ नेता भी शहर में प्रचार कर रहे हैं।”

शिवसेना की चुनावी संभावनाओं के बारे में पूछे जाने पर गोरहे ने कोई आंकड़ा नहीं बताया, लेकिन कहा, “हम एक अच्छे परिणाम की उम्मीद कर रहे हैं, जो पुणे नगर निगम के निर्णय लेने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सके।”

पुणे नगर निगम चुनाव अलग लड़ने के लाभ या हानि के बारे में गोरहे ने कहा कि राजनीति में हर स्थिति को आगे बढ़ने और चुनौतियों को पार करने का अवसर माना जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, “शिवसेना और भाजपा के बीच राज्य और केंद्रीय आलाकमान की घोषणा के अनुसार गठबंधन होने की उम्मीद थी। शुरुआत में हमने 35 सीट चुनी थीं, जो बाद में 25 तक सीमित हो गईं। लेकिन बार-बार विचार-विमर्श के बाद हमने तय किया कि अपनी प्राथमिकताओं के आधार पर वार्ड चुनना भाजपा की सलाह पर निर्भर रहने से अधिक महत्वपूर्ण है।”

गोरहे ने कहा कि राज्य भाजपा और शिवसेना नेतृत्व के बीच समझौता होने की उम्मीद थी, लेकिन भाजपा अपने रुख पर अड़ी रही और केवल 12 सीट देने को तैयार हुई।

उन्होंने कहा कि इनमें से सात सीट ऐसी थीं जहां पिछले चुनावों में भाजपा और शिवसेना लगातार हारती रही हैं।

उन्होंने कहा, “हम चाहते थे कि गठबंधन गरिमा और समान स्थिति के साथ हो, लेकिन ऐसा नहीं हुआ, इसलिए हमने अपने उम्मीदवार खड़े किए। अकेले चुनाव लड़ने से हमें अपनी ताकत का आकलन करने और मतदाताओं का विश्वास जीतने का अवसर मिला।”

चुनाव के बाद भाजपा के साथ गठबंधन की संभावना के बारे में पूछे जाने पर गोरहे ने कहा कि यह काल्पनिक सवाल है।

उन्होंने कहा, “इस समय हम इसके बारे में नहीं सोच सकते। हमारी प्राथमिकता अच्छी संख्या में सीट जीतने की है, और चुनाव परिणाम के बाद निगम में किस तरह की राजनीतिक स्थिति बनती है, यह दूसरी बात है।”

हालांकि, उन्होंने कहा कि शिवसेना अपने घोषणापत्र में दिए एजेंडे को स्वीकार करने वाली किसी भी पार्टी के साथ गठबंधन करने को तैयार है।

गोरहे ने कहा कि इस एजेंडे में पहाड़ियों का संरक्षण, पर्यावरण संतुलन, सतत विकास लक्ष्य और आवास से जुड़े मुद्दे शामिल हैं।

उन्होंने कहा, “हम हमारा एजेंडा स्वीकार करने वालों के साथ गठबंधन करने के बारे में विचार करेंगे। हालांकि गठबंधन पर अंतिम निर्णय एकनाथ शिंदे लेंगे।”

शिवसेना के घोषणापत्र में कहा गया है कि सत्ता में आने पर वह पहाड़ियों और जैव विविधता क्षेत्रों की सुरक्षा करेगी और पुणे के आसपास के वनस्पति और जीव-जंतुओं के संरक्षण के लिए काम करेगी।

गोरहे ने कहा, “हमें पर्यावरण और विकास योजना के साथ-साथ जैव विविधता योजना पर भी विचार करना होगा। इसके अलावा पुणे महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (पीएमआरडीए) क्षेत्र को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।”

भाषा जोहेब मनीषा

मनीषा