राज्य महिला आयोग ने छात्रा की आत्महत्या मामले की जांच में स्कूल में गंभीर लापरवाहियों को उजागर किया
राज्य महिला आयोग ने छात्रा की आत्महत्या मामले की जांच में स्कूल में गंभीर लापरवाहियों को उजागर किया
ठाणे, तीन जनवरी (भाषा) महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रुपाली चाकणकर ने कहा है कि एक सरकारी आवासीय विद्यालय में 16 वर्षीय आदिवासी छात्रा की कथित आत्महत्या के मामले की प्रारंभिक जांच में संस्थान में गंभीर लापरवाहियां सामने आई हैं।
चाकणकर ने शुक्रवार को ठाणे जिले की मुरबाड तहसील के मोरोशी स्थित उस स्कूल का दौरा किया, जहां 25 दिसंबर को 10वीं कक्षा की एक छात्रा ने फंदा लगाकर कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी।
इस मामले में यौन उत्पीड़न और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में 17 वर्षीय एक लड़के को भारतीय न्याय संहिता और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत हिरासत में लिया गया।
कुछ अभिभावकों ने हाल में स्कूल में अत्यधिक कठोर अनुशासन को लेकर शिकायतें की थीं।
चाकणकर ने यहां संवाददाताओं से बातचीत में दावा किया कि छुट्टियों के बाद स्कूल लौटने वाली छात्राओं को गर्भावस्था जांच के लिए मजबूर किया गया।
उन्होंने कहा, “इस तरह की जांच शर्मनाक हैं और लड़कियों के आत्मसम्मान और आत्मविश्वास को तोड़ते हैं। आयोग ने आदिवासी विकास विभाग को इस तरह के परीक्षण को तत्काल बंद करने का निर्देश दिया है।”
उन्होंने एक ‘‘गंभीर सुरक्षा चूक’’ पर भी प्रकाश डाला, जहां नजदीकी रिश्तेदार के रूप में सूचीबद्ध नहीं किए गए व्यक्तियों को छुट्टियों के दौरान लड़कियों को घर ले जाने की कथित तौर पर अनुमति दी गई।
चाकणकर ने कहा, “कम समय में इस संस्था में आत्महत्या का दूसरा मामला है। हमने आदेश दिए हैं कि सोमवार से स्कूल के पूरे कामकाज की व्यापक जांच की जाए।”
इस बीच, कठोर अनुशासन के आरोपों के बाद स्कूल के प्रधानाचार्य प्रह्लाद भोई और वार्डन जयश्री वाघधे को निलंबित कर दिया गया है।
उन्होंने कहा, “पूरे तंत्र को पारदर्शी बनना होगा। हमने स्कूल प्रशासन को छात्राओं को तत्काल परामर्श उपलब्ध कराने और मानसिक दबाव के किसी भी संकेत पर नजर रखने के लिए अभिभावकों के साथ नियमित संवाद बनाए रखने का निर्देश दिया है।”
भाषा खारी दिलीप
दिलीप

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