ठाणे की अदालत ने नाबालिग के यौन उत्पीड़न मामले में व्यक्ति को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई

ठाणे की अदालत ने नाबालिग के यौन उत्पीड़न मामले में व्यक्ति को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई

ठाणे की अदालत ने नाबालिग के यौन उत्पीड़न मामले में व्यक्ति को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई
Modified Date: February 25, 2026 / 11:25 am IST
Published Date: February 25, 2026 11:25 am IST

ठाणे, 25 फरवरी (भाषा) ठाणे की एक विशेष पॉक्सो अदालत ने 2021 में 13 वर्षीय लड़की के यौन उत्पीड़न के मामले में एक व्यक्ति को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।

अदालत ने यह पाया कि ‘जघन्य’ अपराध किसी भी प्रकार की नरमी बरतने लायक नहीं था।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश डी.एस. देशमुख ने सोमवार को कहा कि हालांकि आरोपी की डीएनए रिपोर्ट पीड़िता के भ्रूण से मेल नहीं खाती, लेकिन उसके खिलाफ पर्याप्त मौखिक और दस्तावेजी सबूतों को देखते हुए यह नहीं कहा जा सकता कि उसने पीड़िता का यौन उत्पीड़न नहीं किया।

उन्होंने आरोपी सद्दाम अक्कच मोल्ला को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया।

अदालत ने दोषी पर 5,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया और निर्देश दिया कि यह राशि पीड़िता को दी जाए।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, मई 2021 में महाराष्ट्र के ठाणे जिले के काशिमीरा निवासी मोल्ला ने ट्यूशन क्लास जा रही नाबालिग को रोक दिया था।

आरोपी ने हिंदी में पत्र लिखने में मदद की जरूरत का बहाना बनाकर उसे अपने घर बुलाया और उसका यौन उत्पीड़न किया।

पीड़िता द्वारा अगस्त 2021 में पेट में दर्द की शिकायत किए जाने पर उसके गर्भवती होने का पता चला और तभी अपराध सामने आया।

मुकदमे की सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि पीड़िता का दो अलग-अलग घटनाओं में दो व्यक्तियों ने उत्पीड़न किया था तथा पुलिस ने दो मामले दर्ज किए थे।

बचाव पक्ष ने आरोपी को बरी करने की दलील देते हुए कहा कि उसकी डीएनए रिपोर्ट भ्रूण से मेल नहीं खाती है।

हालांकि, न्यायाधीश ने पीड़ित के सुसंगत बयान और चिकित्सा साक्ष्यों पर भरोसा करते हुए इस तर्क को खारिज कर दिया।

अदालत ने कहा, “आरोपी का कृत्य जघन्य है। इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए और दोनों पक्षों की दलीलों तथा अपराध की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए, आरोपी किसी भी प्रकार की नरमी का हकदार नहीं है।”

अदालत ने कहा कि हालांकि आरोपी की डीएनए रिपोर्ट भ्रूण से मेल नहीं खाती, लेकिन यह नहीं कहा जा सकता कि उसने पीड़िता का यौन उत्पीड़न नहीं किया है। उसके खिलाफ पर्याप्त मौखिक और दस्तावेजी सबूत मौजूद हैं।

अदालत ने पीड़िता को अतिरिक्त मुआवजा दिलाने के लिए इस मामले को ठाणे जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) को सौंपने की सिफारिश की है।

विशेष लोक अभियोजकों संजय लोंढे और संध्या एच. म्हात्रे ने आरोपों को साबित करने के लिए छह गवाहों के बयान दर्ज किए।

भाषा यासिर वैभव

वैभव


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