ठाणे के व्यक्ति को बच्ची का यौन उत्पीड़न करने के जुर्म में 20 साल की सज़ा

ठाणे के व्यक्ति को बच्ची का यौन उत्पीड़न करने के जुर्म में 20 साल की सज़ा

ठाणे के व्यक्ति को बच्ची का यौन उत्पीड़न करने के जुर्म में 20 साल की सज़ा
Modified Date: January 6, 2026 / 12:39 pm IST
Published Date: January 6, 2026 12:39 pm IST

ठाणे, छह जनवरी (भाषा) ठाणे की एक अदालत ने 10 साल की बच्ची का यौन उत्पीड़न करने के जुर्म में एक आदमी को 20 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।

अदालत ने कहा कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए और समाज में ‘‘ऐसी ही आपराधिक सोच वाले लोगों’’ को एक कड़ा संदेश देने के लिए यह सजा जरूरी है।

विशेष पॉक्सो (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम) अदालत की न्यायाधीश रूबी यू मालवणकर ने तीन जनवरी को दिए गए फैसले में कहा कि 35 साल के आरोपी को इलाके के बच्चे ‘समोसेवाला अंकल’ कहकर बुलाते थे क्योंकि वह उन्हें समोसे खिलाता था लेकिन उसने उनके भरोसे एवं विश्वास को तोड़ा।

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आरोपी विजयभान उर्फ ​​अमित सूरजबली सरोज महाराष्ट्र में ठाणे शहर के वर्तकनगर इलाके में नेहरूनगर झुग्गी बस्ती का रहने वाला है। उसे भारतीय दंड संहिता की धाराओं 376(2)(एन) (बार-बार बलात्कार) और 506 (आपराधिक धमकी) और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम की धाराओं पांच और छह (गंभीर यौन उत्पीड़न) के तहत दोषी ठहराया गया।

आरोपी ने पड़ोस के बच्चों को अक्सर समोसे खिलाकर पीड़िता के परिवार का भरोसा जीत लिया था।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी ने चार जनवरी से 22 जनवरी, 2024 के बीच कई बार पीड़िता को जबरदस्ती अपने घर ले जाकर उसका यौन उत्पीड़न किया। यह अपराध 23 जनवरी, 2024 को तब सामने आया जब स्कूल की एक शिक्षिका ने पीड़िता को रक्तस्राव होते देख उसकी मां को बताया।

न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा, ‘‘इस मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करने के बाद यह ध्यान देने योग्य है कि इलाके के बच्चे आरोपी को पसंद करते थे और उसे ‘समोसेवाला अंकल’ कहकर बुलाते थे। न केवल बच्चे बल्कि उनके परिवारों ने भी उस पर भरोसा किया था क्योंकि वह बच्चों को समोसे खिलाता था।’’

उन्होंने कहा, ‘‘पीड़िता को बार-बार अपने घर ले जाकर और उसके साथ गंभीर यौन उत्पीड़न करके आरोपी ने उस भरोसे और विश्वास को तोड़ा।’’

अदालत ने यह भी कहा कि पीड़िता को शारीरिक और मानसिक रूप से भी बहुत कष्ट हुआ।

उसने कहा, ‘‘इन सभी तकलीफों, पीड़ा और मामले की गंभीरता को देखते हुए, आरोपी को उचित सजा मिलनी चाहिए ताकि दो मकसद पूरे हो सकें, पहला, उसने जो अपराध किया है उसके लिए उसे सजा मिले और दूसरा, समाज में ऐसी ही सोच वाले आपराधिक तत्वों को सही संदेश जाए।’’

अदालत ने कहा कि यह ध्यान देने वाली बात है कि ऐसा अपराध करने वाला व्यक्ति आम तौर पर यह सुनिश्चित करने के लिए काफी सावधानी बरतेगा कि उसकी गतिविधियों को कोई न देखे और ‘‘इसलिए, सिर्फ़ इस बात से कि जांच अधिकारी को कोई चश्मदीद गवाह नहीं मिला… पीड़िता की गवाही को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।’’

अदालत ने सरोज को पॉक्सो अधिनियत के तहत अपराधों के लिए 20 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई और उस पर 5,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। इसके अलावा, अदालत ने उसे भारतीय दंड संहिता की धारा 506 के तहत आपराधिक धमकी के लिए तीन साल की कड़ी कैद और 1,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। दोनों सज़ाएं साथ-साथ चलेंगी।

न्यायाधीश ने सिफारिश की कि जुर्माने की रकम पीड़िता को मुआवज़े के तौर पर दी जाए।

भाषा मनीषा सिम्मी

सिम्मी


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