पिता का बेटी का यौन शोषण करने से ज्यादा चौंकाने वाला व जघन्य अपराध कोई नहीं है : अदालत

पिता का बेटी का यौन शोषण करने से ज्यादा चौंकाने वाला व जघन्य अपराध कोई नहीं है : अदालत

पिता का बेटी का यौन शोषण करने से ज्यादा चौंकाने वाला व जघन्य अपराध कोई नहीं है : अदालत
Modified Date: July 16, 2026 / 05:39 pm IST
Published Date: July 16, 2026 5:39 pm IST

मुंबई, 16 जुलाई (भाषा) मुंबई उच्च न्यायालय ने अपनी नाबालिग बेटी के साथ बलात्कार के दोषी एक व्यक्ति की सजा को बरकरार रखते हुए कहा कि पिता द्वारा बेटी का यौन शोषण करने से ज्यादा चौंकाने वाला और जघन्य अपराध कोई नहीं है।

उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ ने 15 जुलाई के अपने फैसले में 43 वर्षीय व्यक्ति की अपील खारिज कर दी, जिसने अपनी 12 साल की बेटी के साथ बलात्कार और उसे गर्भवती करने के मामले में अपनी सजा को चुनौती दी थी।

याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में दावा किया था कि उसे इस मामले में फंसाया गया है क्योंकि वह अपनी बेटी को डांटता था।

हालांकि, न्यायमूर्ति उर्मिला जोशी फाल्के और न्यायमूर्ति निवेदिता मेहता की पीठ ने इस दलील को खारिज कर दिया और कहा कि पीड़िता को मानसिक सदमा पहुंचा है और वह किसी को भी इस घटना के बारे में बता नहीं पाई क्योंकि इसमें उसका अपना पिता संलिप्त था।

पीठ ने कहा, ‘‘आरोपी ने उस भरोसे को तोड़ा है जो एक बच्चे को अपने पिता पर होता है। जिसे अपने बच्चे का रक्षक होना चाहिए था, उसी ने अपनी बेटी की जिंदगी बर्बाद कर दी है। उसने उस बेबस लड़की की आत्मा को भी ठेस पहुंचाई है।’’

पीड़िता ने एक बच्चे को जन्म दिया था और डीएनए परीक्षण से साबित हुआ कि आरोपी और पीड़िता ही बच्चे के जैविक माता-पिता हैं।

इस व्यक्ति के खिलाफ अप्रैल 2021 में मामला दर्ज किया गया था, जब पीड़िता ने पेट दर्द की शिकायत की और पता चला कि वह सात महीने की गर्भवती थी।

बाद में लड़की ने डॉक्टरों को बताया कि उसके पिता ने उसके साथ बलात्कार किया था।

भाषा शफीक अविनाश

अविनाश


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