टीएमसी चुनाव: बागी उम्मीदवार ने शिवसेना प्रत्याशी को विकास कार्यों का रिकॉर्ड दिखाने की चुनौती दी

टीएमसी चुनाव: बागी उम्मीदवार ने शिवसेना प्रत्याशी को विकास कार्यों का रिकॉर्ड दिखाने की चुनौती दी

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  • Publish Date - January 5, 2026 / 10:50 AM IST,
    Updated On - January 5, 2026 / 10:50 AM IST

ठाणे, पांच जनवरी (भाषा) बागी उम्मीदवार नितिन लांडे ने कहा है कि अगर उनके प्रतिद्वंद्वी और वार्ड नंबर चार से शिवसेना के उम्मीदवार सिद्धार्थ पांडे अगर क्षेत्र में की गई किसी विकासात्मक पहल को साबित कर दें तो वह अपनी उम्मीदवारी छोड़ देंगे।

लांडे 15 जनवरी को होने वाले टीएमसी चुनाव में टिकट न मिलने के कारण पिछले सप्ताह युवा सेना के कोर कमेटी सदस्य पद से इस्तीफा दे चुके हैं।

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने उनके बजाय सिद्धार्थ पांडे को मैदान में उतारा, जो पूर्व नगरपार्षद संजय पांडे के बेटे हैं। इस फैसले के बाद लांडे ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है।

रविवार को एक संवाददाता सम्मेलन में लांडे ने आरोप लगाया कि संजय पांडे का संगठनात्मक गतिविधियों में बहुत कम योगदान था।

उन्होंने आरोप लगाया, “उपमुख्यमंत्री पर एक पत्र के माध्यम से दबाव डाला गया था जिसमें टिकट न दिए जाने पर राजनीतिक परिणामों की धमकी दी गई थी।”

उन्होंने कहा कि यदि योग्यता और जमीनी स्तर पर काम ही एकमात्र मानदंड होते तो स्थिति अलग होती।

बागी उम्मीदवार ने कहा, “मैं शिवसेना के खिलाफ नहीं हूं, जिसने आगे बढ़ने में मेरी मदद की, न ही एकनाथ शिंदे के खिलाफ हूं, जिन्हें मैं अब भी अपना मार्गदर्शक मानता हूं। मेरी लड़ाई इस वार्ड पर थोपे गए उम्मीदवार के खिलाफ है।”

लांडे ने दावा किया कि उन्होंने वर्षों तक क्षेत्र में युवाओं और स्थानीय निवासियों के लाभ के लिए कड़ी मेहनत की है।

उन्होंने कहा कि अगर उनके प्रतिद्वंदी सिद्धार्थ पांडे या उनके परिवार से कोई भी विकासात्मक पहल दिखा सके, तो वह तुरंत चुनावी दौड़ से हट जाएंगे।

उन्होंने अपने चुनाव चिह्न ‘नारियल’ को शुभ मानते हुए कहा कि “हर राजनीतिक यात्रा एक नारियल चढ़ाने से शुरू होती है।”

भाजपा में रहे संजय पांडे ने 2014 में ठाणे के ओवला-माजीवाड़ा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था और 2016 में अविभाजित शिवसेना में शामिल हो गए थे।

वह वार्ड नंबर चार से नगरसेवक रहे और 2022 में पार्टी के विभाजन के बाद शिंदे गुट में शामिल हो गए।

भाषा जोहेब मनीषा

मनीषा