बिहार में ‘कुशल युवा कार्यक्रम’ 2030 तक जारी रहेगा
बिहार में ‘कुशल युवा कार्यक्रम’ 2030 तक जारी रहेगा
पटना, 12 अगस्त (भाषा) बिहार सरकार ने युवाओं को बदलती तकनीक और उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप रोजगारपरक बनाने के लिए ‘कुशल युवा कार्यक्रम’ को वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने का फैसला किया है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव समेत 10 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।
‘सात निश्चय-3’ के निश्चय-1 ‘दोगुना रोजगार-दोगुनी आय’ के तहत बिहार कौशल विकास मिशन के ‘कुशल युवा कार्यक्रम’ का अगले पांच वर्षों के लिए विस्तार किया गया है। इसके क्रियान्वयन के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में 430 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।
मंत्रिमंडल विभाग के अनुसार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और डिजिटल क्षेत्र में नयी तकनीकों के आगमन को देखते हुए कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण का स्वरूप बदला जाएगा। युवाओं को सौर ऊर्जा, ड्रोन तकनीक, नेटवर्किंग, होम नर्सिंग, मल्टी-स्किल्ड लैब तकनीशियन, इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन, ब्यूटी एवं वेलनेस, वेब सूचना प्रौद्योगिकी, डिजिटल मार्केटिंग, बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं, टैली, भाषा और उद्यमिता जैसे रोजगारपरक क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाएगा।
कार्यक्रम के तहत 6,436 प्रशिक्षण केंद्रों का संचालन किया जाएगा, जिससे प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। इन केंद्रों में हर वर्ष करीब 2.57 लाख युवाओं को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है। प्रशिक्षण प्राप्त युवा नौकरी हासिल करने के साथ-साथ अपना उद्यम शुरू कर अन्य लोगों को भी रोजगार देने में सक्षम होंगे।
मंत्रिमंडल की बैठक के बाद सचिव मोहम्मद सोहैल ने संवाददाता सम्मेलन में बताया कि उच्च शिक्षा के लिए विद्यार्थियों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था को अधिक व्यापक, सुलभ, गुणवत्तापूर्ण और दीर्घकालिक रूप से वित्तीय दृष्टि से सतत बनाने के उद्देश्य से बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना को भी वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक अगले पांच वर्षों के लिए बढ़ाया गया है।
उन्होंने बताया कि योजना के क्रियान्वयन के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में 950 करोड़ रुपये के व्यय का प्रावधान किया गया है। इस निर्णय से राज्य में विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के अधिक अवसर उपलब्ध होंगे, उच्च शिक्षा तक उनकी पहुंच मजबूत होगी तथा राज्य के सकल नामांकन अनुपात में वृद्धि को प्रोत्साहन मिलेगा।
मंत्रिमंडल ने राज्य के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में नामांकन प्रक्रिया में बदलाव को भी मंजूरी दी। अब निजी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों की कुल स्वीकृत सीटों में से 50 प्रतिशत सीटों पर नामांकन बिहार संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद, पटना के माध्यम से किया जाएगा।
सरकार का मानना है कि इससे आईटीआई में नामांकन प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी।
मंत्रिमंडल ने राज्य के 300 निजी शिक्षक शिक्षा संस्थानों (बीएड कॉलेज) को बहुविषयक डिग्री महाविद्यालय के रूप में विकसित करने की मंजूरी भी दी।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप बिहार में संचालित एकल निजी बीएड संस्थानों को अब बहुविषयक डिग्री महाविद्यालय के रूप में विकसित किया जाएगा।
इसके तहत एनसीटीई से मान्यता प्राप्त निजी शिक्षक शिक्षा संस्थानों में बीएड के साथ कला, विज्ञान और वाणिज्य सहित अन्य विषयों के स्नातक पाठ्यक्रम शुरू किए जा सकेंगे। इसके अलावा कौशल आधारित पाठ्यक्रमों के संचालन का भी रास्ता खुलेगा।
नए पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए संबंधित विश्वविद्यालय, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी), एनसीटीई और राज्य सरकार द्वारा निर्धारित मानकों तथा आवश्यक स्वीकृतियों का पालन करना होगा।
सरकार का कहना है कि इस पहल से विद्यार्थियों को अपने जिले या आसपास के क्षेत्रों में ही उच्च शिक्षा के अधिक विकल्प मिलेंगे और उच्च शिक्षा तक उनकी पहुंच आसान होगी। इससे राज्य में उच्च शिक्षा के सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) को बढ़ाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
बहुविषयक महाविद्यालयों के विकास से एक ही संस्थान में अलग-अलग विषयों की पढ़ाई का अवसर मिलेगा। इससे विद्यार्थियों को अपनी रुचि और रोजगार की संभावनाओं के अनुरूप विषय चुनने में सुविधा होगी।
भाषा
कैलाश रवि कांत
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