Pongal 2026: कब है पोंगल, और क्यों इस दिन उबलता है समृद्धि का बर्तन? जान लें तिथि, इतिहास, महत्व और पूजन विधि की पूरी गाइड!

'पोंगल' (Pongal) दक्षिण भारत, खास तौर पर तमिलनाडु में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण फसल का त्यौहार है, जो किसानों की कड़ी मेहनत के लिए उन्हें धन्यवाद देने के लिए मनाया जाता है। जनवरी 2026 में, 14 जनवरी से लेकर 17 जनवरी तक मनाया जायेगा। आइये विस्तारपूर्वक जानते हैं..

Pongal 2026: कब है पोंगल, और क्यों इस दिन उबलता है समृद्धि का बर्तन? जान लें तिथि, इतिहास, महत्व और पूजन विधि की पूरी गाइड!

Pongal 2026

Modified Date: January 5, 2026 / 06:19 pm IST
Published Date: January 5, 2026 6:17 pm IST
HIGHLIGHTS
  • पोंगल का असली मतलब क्या है?
  • पोंगल क्यों है किसानों का सबसे बड़ा जश्न?

Pongal 2026 Date: ‘पोंगल(Pongal) दक्षिण भारत, खास तौर पर तमिलनाडु में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण फसल का त्यौहार है, जो किसानों की कड़ी मेहनत के लिए उन्हें धन्यवाद देने के लिए मनाया जाता है। ‘पोंगल’ शब्द का अर्थ “उफान आना” या “उबालना” है जो जीवन में समृद्धि और खुशहाली के उफान को दर्शाता है। जनवरी 2026 में, 14 जनवरी से लेकर 17 जनवरी तक मनाया जाने वाला ये चार दिनों का उत्सव, दिलों में खुशियों के रंग भर देता है।

‘पोंगल’ एक फसल उत्सव है, जो तमिल समुदाय द्वार थाई महीने के पहले दिन मनाया जाता है और विशेष रूप से सूर्य देव को धन्यवाद दिया जाता है। आइये विस्तारपूर्वक जाने इसका महत्व और पूजन विधि?

Pongal 2026: पोंगल कैसे मनाया जाता है?

पोंगल चार दिनों का फसल उत्सव है। जिसके दौरान घरों में साफ़-सफाई, पूजा-पाठ और अपने परिवार के साथ अच्छा समय बिताने का बेहतरीन अवसर है।

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  • भोगी पोंगल (14 जनवरी 2026): पहले दिन “भोगी पोंगल” के दौरान, घरों में साफ़-सफाई की जाती है, हर एक कोने को चमकाया जाता है, पुरानी चीज़ों को जलाकर या त्यागकर एक नई शुरुआत की जाती है।

  • थाई पोंगल (15 जनवरी 2026): दूसरे दिन “थाई पोंगल” के दौरान, भगवान की विशेष पूजा की जाती है। नए बर्तन में पोंगल (पकवान) बनाते हैं और उफान आने पर “पोंगलों पोंगल” चिल्लाकर खुश होते हैं।

  • मट्टू पोंगल(16 जनवरी 2026): तीसरे दिन “मट्टू पोंगल” के दौरान, मवेशियों या खेतों में कार्य कर रहे गाय-बैलों का सम्मान किया जाता है क्योंकि वह खेत के साथी हैं, उनकी पूजा की जाती है तथा उनके लिए ख़ास भोजन का इंतेज़ाम किया जाता है।

  • क़ानूम पोंगल (17 जनवरी 2026): “क़ानूम पोंगल”, इन चार दिनों के उत्सव का आखिरी दिन होता है। इसके दौरान परिवार के सदस्य एकजुट होकर रिश्तेदारों से मिलते हैं और खुशियां बाँटते हैं।

Pongal 2026 Date: पोंगल का महत्त्व!

‘पोंगल’ एक महत्वपूर्ण फसल उत्सव है जो किसानों की मेहनत और उन्हें धन्यवाद् देने का अवसर देता है। यह आर्थिक और धार्मिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। आर्थिक दृष्टि से, यह नई फसल की शुरुआत है दूसरी ओर धार्मिक दृष्टि से, यह पर्व सूर्य और इंद्र देव की पूजा से जुड़ा है, क्योंकि सूर्य देव फसलों की वृद्धि में सहायक हैं। यह उत्तरायण की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है, जब सूर्य उत्तर दिशा की ओर बढ़ता है तो अत्यंत शुभ मान जाता है। यह त्यौहार परिवार की एकता, प्रकृति के प्रति सम्मान और सकारात्मक शक्ति को बढ़ावा देता है।

Pongal 2026: पोंगल की सरल पूजा विधि!

पूजा मुख्य रूप से तमिल कैलेंडर के हिसाब से थाई महीने की शुरुआत के दिन की जाती है।

  • सुबह जल्दी उठकर, स्नान करने के पश्चात घर को अच्छे से साफ़ करें।
  • घर की मुख्य देहलीज़ पर कोलम (रंगोली) बनाएं।
  • पशुओं की पूजा के दौरान उन्हें स्नान कराएं, सींग को रंगें एवं उनके गले में घंटी बांधें।
  • मिटटी के नए बर्तन में हल्दी बांधें और गीली विभूति की लकीरें लगाएं।
  • फिर उस बर्तन में चावल, दूध, दाल और गुड़ डालकर अच्छे से उबाल आने दें, उफान आ जाने के पश्चात “पोंगलों पोंगल” कहकर चिल्लाएं।
  • सूर्य देव को फल-फूल, गन्ना तथा बनाया हुआ पोंगल (पकवान) अर्पित करें साथ ही कुमकुम और हल्दी से तिलक कर आरती करें।
  • सह-परिवार प्रसाद ग्रहण करें।

Disclaimer:- उपरोक्त लेख में उल्लेखित सभी जानकारियाँ प्रचलित मान्यताओं और धर्म ग्रंथों पर आधारित है। IBC24.in लेख में उल्लेखित किसी भी जानकारी की प्रामाणिकता का दावा नहीं करता है। हमारा उद्देश्य केवल सूचना पँहुचाना है।

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