Raksha Bandhan 2026: भाई की कलाई पर राखी बांधने की परंपरा कहां से आई? सनातन धर्म की इस परंपरा के पीछे छिपी है चौंकाने वाली वजह

Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंदन पर बांधा जाने वाला रक्षा सूत्र भाई-पहन के प्रेम, विश्वास और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। सनातन परंपरा में इसे बेहद पवित्र माना गया है। भगवान कृष्ण-द्रौपदी और राजा बलि, माता लक्ष्मी से जुड़ी पौराणिक कथाएं रक्षा सूत्र के धार्मिक महत्व को बताती है।

Raksha Bandhan 2026: भाई की कलाई पर राखी बांधने की परंपरा कहां से आई? सनातन धर्म की इस परंपरा के पीछे छिपी है चौंकाने वाली वजह

(Raksha Bandhan 2026/ Image Credit: AI-generated)

Modified Date: August 21, 2026 / 10:44 am IST
Published Date: August 21, 2026 10:42 am IST
HIGHLIGHTS
  • रक्षा सूत्र सिर्फ धागा नहीं, प्रेम और सुरक्षा का प्रतीक है।
  • कृष्ण-द्रौपदी की कथा से जुड़ी है राखी की पवित्र मान्यता।
  • माता लक्ष्मी और राजा बलि की कथा भी है खास।

Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। इस साल रक्षाबंधन का पर्व शुक्रवार 28 अगस्त (Raksha Bandhan 2026) को मनाया जाएगा। सनातन परंपरा में राखी या रक्षा सूत्र को केवल धागा नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। इस दिन बहनें भाइयों की कलाई पर राखी बांधती है और उनके सुख, स्वास्थ्य व लंबी उम्र की कामना करती है। वहीं, भाई बहन की रक्षा और हर मुश्किल में साथ देने का संकल्प लेते हैं। माना जाता है कि श्रद्धा और सही भावना के साथ रक्षा सूत्र बांधने से रिश्तों में मजबूती और घर में सकारात्मकता आती है।

भगवान कृष्ण और द्रौपदी की कथा

रक्षा सूत्र से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध कथाओं (Raksha Bandhan 2026) में भगवान कृष्ण और द्रौपदी की कहानी शामिल है। मान्यता के अनुसार, एक बार भगवान कृष्ण की उंगली में चोट लग गई और खून निकलने लगा। यह देखकर द्रौपदी ने तुरंत अपनी साड़ी का एक टुकड़ा फाड़कर उनकी उंगली पर बांध दिया। द्रौपदी के इस स्नेह और अपनापन से कृष्ण भावुक हो गए और उन्होंने उनकी रक्षा करने का वचन दिया। बाद में जब हस्तिनापुर की सभा में द्रौपदी का अपमान हुआ, तब भगवान कृष्ण ने उनकी लाज बचाई। यह कथा सिखाती है कि सच्चे प्रेम और विश्वास का रिश्ता बेहद मजबूत होता है।

राजा बलि और माता लक्ष्मी की कहानी

राखी से जुड़ी एक अन्य प्रसिद्ध कथा राजा बलि और माता लक्ष्मी की है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु के वामन अवतार के बाद राजा बलि ने उनसे अपने साथ रहने का आग्रह किया। भगवान विष्णु उनके पास रहने लगे। तब माता लक्ष्मी ने राजा बलि को रक्षा सूत्र बांधा और उन्हें अपना भाई मान लिया। बदले में उन्होंने भगवान विष्णु को वापस वैकुंठ ले जाने का वर मांगा। राजा बलि ने इसे स्वीकार कर लिया। यह कथा रक्षा सूत्र को प्रेम, विश्वास और पारिवारिक भावनाओं से जोड़ती है।

समय के साथ बदला त्योहार का स्वरूप

समय के साथ रक्षाबंधन का स्वरूप (Raksha Bandhan 2026) बदलता गया और यह मुख्य रूप से भाई-बहन के रिश्ते का त्योहार बन गया। आज बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधकर उनकी खुशहाली की कामना करती हैं, जबकि भाई उनकी रक्षा और हर परिस्थिति में साथ देने का वादा करते हैं। लेकिन रक्षा सूत्र का महत्व केवल भाई-बहन तक सीमित नहीं माना जाता। यह प्रेम, जिम्मेदारी, सम्मान और एक-दूसरे के प्रति कर्तव्य की भावना को भी दर्शाता है। इसी कारण से रक्षाबंधन आज भी लोगों को अपनी परंपराओं और पारिवारिक रिश्तों से जोड़ने वाला खास पर्व माना जाता है।

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लेखक के बारे में

मैं 2018 से पत्रकारिता में सक्रिय हूँ। हिंदी साहित्य में मास्टर डिग्री के साथ, मैंने सरकारी विभागों में काम करने का भी अनुभव प्राप्त किया है, जिसमें एक साल के लिए कमिश्नर कार्यालय में कार्य शामिल है। पिछले 7 वर्षों से मैं लगातार एंटरटेनमेंट, टेक्नोलॉजी, बिजनेस और करियर बीट में लेखन और रिपोर्टिंग कर रहा हूँ।