SarkarOnIBC24: परिवारवाद से नहीं उबर पा रहे सियासी दल.. देखें किस तरह नेताओं के बीच मचा है भाई-भतीजावाद
Sarkar On IBC24 परिवारवाद से नहीं उबर पर रहे सियासी दल.. देखें किस तरह नेताओं के बीच मचा है भाई-भतीजावाद
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भोपाल: मध्यप्रदेश की सियासत भी गजब है। यहां सभी दलों के नेता परिवारवाद के खिलाफ तो पानी पी-पी कर बोलते हैं। लेकिन हकीकत ये है कि राज्य में सभी बड़े दल परिवारवाद को पालते-पोसते हैं। बीजेपी की पहले चार लिस्ट आ चुकी है। जिसमें कई नेताओं के परिजनों को जगह मिली है। कांग्रेस की पहली लिस्ट आई तो हालात कुछ ऐसे ही दिखे। नेता पुत्र या परिजन भी इस लिस्ट में हावी हैं। अब ऐसे में दोनों की दल की सफाई है उन्हें सीट जीतनी है, फिर दांव किसी पर भी लगाना पड़े।
कांग्रेस की पहली सूची 144 नामों का ऐलान किया। जिसमें परिवारवाद देखने को मिला है। कांग्रेस का भाई-भतीजावाद लहार (भिंड) सीट से सातवीं बार के विधायक और नेता विपक्ष डॉ.गोविंद सिंह के भांजे राहुल भदौरिया को उसी भिंड जिले की मेहगांव सीट से मैदान में उतारा गया है।
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नेता प्रतिपक्ष की समधन चंदारानी गौर को खरगापुर से मैदान में उतारा गया है। गौर करने वाली बात ये है कि खरगापुर से उमा भारती के भतीजे राहुल सिंह को बीजेपी ने मैदान में उतारा है।
शिवपूरी जिले की पिछोर सीट से 6 बार के मौजूदा विधायक केपी सिंह कक्काजू को पड़ोसी शिवपुरी सीट पर भेज दिया गया है। जबकि शैलेन्द्र सिंह को पिछोर सीट से उम्मीदवार बनाया गया है। रिश्ते में ये केपी सिंह के भतीजे लगते है। –
पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के विधायक बेटे जयवर्धन सिंह को परिवार के गढ़ राघौगढ़ से मैदान में उतारा गया है और उनके भाई लक्ष्मण सिंह को गुना जिले की चाचौड़ा सीट से दोहराया गया है। दिग्विजय सिंह परिवार के करीबी रिश्तेदार प्रियव्रत सिंह को राजगढ़ जिले की खिलचीपुर सीट से दोबारा टिकट दिया गया है।
गुना जिले की बमोरी सीट पर पार्टी ने पूर्व मंत्री और पूर्व बीजेपी विधायक कन्हैयालाल अग्रवाल के बेटे को ऋषि अग्रवाल को कांग्रेस ने मैदान में उतारा है। उनके पिता इसी सीट से कांग्रेस के टिकट पर साल 2020 का उपचुनाव हार गये थे। कांग्रेस की लिस्ट में तो सिर्फ उनकी पार्टी के नहीं बल्कि दूसरे दलों से आए राजनीति की विरासत संभालने वालों को भी चुनाव में उतारा गया है।
ये हालत ग्वालियर-चंबल संभाग की सीटों के है। लेकिन अगर देखा जाएं तो मध्य प्रदेश की कई ऐसी सीटें है, जिस पर कांग्रेस ओर बीजेपी ने जमकर परिवार वाद को बढ़ावा दिया है। हैरत की बात ये है दोनों ही दल एक दूसरे पर परिवारवाद को बढ़ावा देने के मालमें जमकर एक दूसरे पर बरसते भी है।
बहरहाल मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की पहली उम्मीदवार सूची ने ही उदयपुर डिक्लेरेशन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उदयपुर डिक्लेरेशन में कांग्रेस के 17 पन्नों के घोषणापत्र में पार्टी ने वन पोस्ट-वन पर्सन फॉर्मूला के साथ एक परिवार से एक व्यक्ति को ही टिकट दिए जाने की बात कही थी। हालांकि, एमपी की कैंडिडेट लिस्ट में एक फैमिली को दो टिकट देकर इसे खारिज किया गया है। ऐसे में कांग्रेस ओर यहाँ बीजेपी दोनों ही मंच से एक दूसरे पर परिवारवाद को बढ़ावा देने के नाम पर बरसते हो। लेकिन हकीकत में ऐसा नही है।

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